नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को “औकात में रहो” कह दिया। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया और वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। करीब 40 मिनट तक सदन में शोर-शराबा चलता रहा।
किन मुद्दों पर हो रही थी बहस?
विपक्ष सरकार को भागीरथपुरा मौत कांड और लाड़ली बहना योजना जैसे मुद्दों पर घेर रहा था। इसी दौरान सिंघार ने सिंगरौली में सरकार और अदाणी समूह के बीच हुए करार का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार बिजली खरीद समझौते के तहत 25 साल में बड़ी रकम देने की तैयारी में है। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई और कहा कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए। बहस के दौरान आरोप-प्रत्यारोप बढ़े और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सीएम ने मांगी माफी, फिर भी नहीं थमा विवाद
विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी के मुंह से अनजाने में कोई शब्द निकल गया हो तो वह उसकी ओर से माफी मांगते हैं। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस विधायक शांत नहीं हुए। अंततः सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा की गौरवशाली परंपरा रही है, लेकिन आज असहज स्थिति बन गई। उन्होंने माना कि दोनों पक्षों की ओर से गुस्सा दिखा, जो चिंता का विषय है।
विजयवर्गीय ने जताया दुख, सिंघार का पलटवार
विवाद के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि वह अपने व्यवहार से दुखी हैं और उमंग सिंघार को प्यार करते हैं। वहीं सिंघार ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी “औकात” जनता के सवालों को सत्ता के सामने रखने की है। उन्होंने इसे प्रदेश की जनता का अपमान बताया और मंत्री से इस्तीफे की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष इसे सत्ता के अहंकार से जोड़ रहा है, जबकि सरकार इसे बहस के दौरान भावावेश में कही गई बात बता रही है। फिलहाल, मामला शांत होने के बजाय और ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।





