नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । हाल ही के दिनों में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर नोट का ढेर मिलने का मामला गहराता जा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक जांच कमेटी को गठन किया है। वहीं, जज यशवंत वर्मा को फिलहाल काम करने के अनुमति नहीं दी है। उनके कार्य पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना को जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले पर मिली नोटों के ढेर और आग के बारे में एक रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के घर से कैश बरामद होने का भी जिक्र किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस रिलीज में बताया कि घर को जले हुए नोटों के ढेरों बंडल मिले हैं।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने मामले में क्या कहा –
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस मामले पर कहा कि, मुझे कभी भी आउटहाउस के स्टोररूम में नकदी के पड़े होने की जानकारी नहीं थी। न ही परिवार के किसी सदस्य को। जस्टिस वर्मा ने कहा कि, ऐसे में पैसे मिलने का सवाल ही नहीं उठता। मैं इस आरोप को भी दृढ़ता से नकारता हूं और पूरी तरह से खारिज करता हूं। उन्होंने कहा कि हमें न तो जली हुई मुद्रा की कोई बोरी दिखाई गई और न ही सौंपी गई। आपको बता दें कि, यह कोई नया मामला नहीं है इससे पहले देश के बड़े जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
जस्टिस एसएन शुक्ला
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस एसएन शुक्ला पर भी पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। उन पर दिसंबर 2019 में सीबीआई ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। उस दौरान सीबीआई ने कहा था कि, उन्होंने मौद्रिक लाभ के लिए लखनऊ स्थित एक मेडिकल कॉलेज को अनुकूल आदेश पारित करके मदद की। न्यायमूर्ति शुक्ला जुलाई 2020 में सेवानिवृत्त हुए।
जस्टिस निर्मल यादव
2008 में ऐसा ही एक मामला सामने आने के बाद बवाल मच गया था। जब 15 लाख रुपये नकद वाला पार्सल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर के आवास पर पहुंचाया गया था। इसको लेकर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में आरोप लगा कि ये पैसे न्यायमूर्ति निर्मल यादव के घर भेजा जाना था, जो कि उसी उच्च न्यायालय में जज थे। यह मुकदमा अभी भी लंबित है। लेकिन इस घटना ने देश में न्यायिक व्यवस्था का सवाल खड़ कर दिया थे।
जस्टिस शमित मुखर्जी
वर्ष 2003 में दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस शमित मुखर्जी भी इस भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार हुए थे। जस्टिस शमित मुखर्जी को सीबीआई ने अरेस्ट किया था। उन पर कई करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में संलिप्तता के आरोप लगे थे। सीबीआई ने आरोप लगाते हुए कहा था। कि, उन्होंने एक ऐसे रेस्टोरेंट मालिक के पक्ष में आदेश दिया जिसने एक सार्वजनिक जमीन पर कब्जा कर रखा था। इसके लिए उन्हें पैसे देने की बात भी सामने आई थी।
जस्टिस सौमित्रा सेन
कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति सौमित्रा सेन पर 1993 में न्यायालय द्वारा नियुक्त रिसीवर के रूप में 32 लाख रुपये के धांधली के आरोप लगे थे। राज्यसभा द्वारा उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद न्यायमूर्ति सेन ने सितंबर 2011 में इस्तीफा दे दिया था।
न्यायमूर्ति पीडी दिनाकरन
न्यायमूर्ति दिनाकरन ने जुलाई 2011 में सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उन पर भारी संपत्ति अर्जित करने और न्यायिक कदाचार के आरोप लगे थे। 2010 में, आरोपों की जांच के लिए राज्यसभा में एक समिति का गठन किया गया था। संभावित महाभियोग से बचने के लिए उन्होंने पद छोड़ दिया।





