नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। केरल राज्य का नाम केरलम करने का प्रस्ताव फिर से चर्चा में है। राज्य की विधानसभा पहले ही दो बार सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास कर चुकी है कि संविधान में राज्य का नाम वही लिखा जाए, जैसा मलयालम भाषा में बोला जाता है।अब केंद सरकार से भी इसे मंजूरी मिल गई है।
मलयालम भाषा में बोला और लिखा जाता है केरलम
राज्य सरकार चाहती है कि संविधान और सभी सरकारी दस्तावेज़ों में राज्य का नाम केरल की जगह केरलम हो। मलयालम में राज्य का नाम पहले से केरलम ही है और राज्य के लोग इसे अपनी भाषा में हमेशा इसी नाम से बुलाते हैं। केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को दो बार सर्वसम्मति से पास किया है और अब इसे केंद्र सरकार की कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई है। अब मंजूरी मिलने के बाद, पार्लियामेंट से संविधान संशोधन पास करना जरूरी होगा ताकि संविधान की पहली अनुसूची और आठवीं अनुसूची में राज्य का नया नाम दर्ज किया जा सके। इसके बाद सभी भाषाओं और सरकारी दस्तावेज़ों में नया नाम अपडेट किया जाएगा।
मुख्य अंतर केवल भाषा का है
असल में, केरल और केरलम दोनों नाम एक ही राज्य के हैं, अंतर केवल भाषा और उच्चारण का है। अंग्रेज़ी और हिंदी में यह नाम केरल के रूप में प्रचलित है, जबकि मलयालम में इसका मूल रूप केरलम है। स्थानीय बोलचाल में भी लोग हमेशा केरलम कहते हैं। इसलिए मुख्य अंतर केवल भाषा का है, न कि राज्य की पहचान या सीमाओं का।
ऐतिहासिक और भाषाई पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक और भाषाई पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो, सम्राट अशोक के 257 ईसा पूर्व के शिलालेख में केरलपुत्र शब्द का उल्लेख मिलता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र को केरल के नाम से जाना जाता था। वहीं, केरलम नाम के पीछे दो प्रमुख मान्यताएँ हैं। एक मान्यता के अनुसार यह नाम “चेरम” शब्द से आया है, जो प्राचीन चेरा राजवंश से जुड़ा था। जर्मन विद्वान डॉ. हरमन गुंडर्ट, जिन्होंने पहला मलयालम-अंग्रेज़ी शब्दकोश तैयार किया, केरलम को इसी चेरम से जोड़ते हैं। दूसरी मान्यता यह है कि केरा का अर्थ नारियल होता है, और चूंकि राज्य में नारियल के पेड़ बहुतायत में हैं, इसे नारियल की भूमि के रूप में भी देखा जाता है।
पहचान और ऐतिहासिक धरोहर का सम्मान
यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि राज्य की संस्कृति, परंपरा और इतिहास का सम्मान भी है। इस बदलाव के बाद केरल के लोग अपनी मातृभाषा के अनुसार अपने राज्य को “केरलम” कह सकेंगे। यह कदम राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपरा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नाम का बदलाव केवल शब्दों का नहीं, बल्कि केरल की मूल पहचान और ऐतिहासिक धरोहर का सम्मान है।





