मुंबई, 14 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल ने बताया कि विदर्भ में बाढ़ की रोकथाम के लिए मध्य प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के सचिवों की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में जिला स्तर पर बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला कलेक्टर, जल संसाधन विभाग और राजस्व विभाग की भी संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी और इस बैठक में बाढ़ की रोकथाम के लिए उपाययोजना की जाएगी विदर्भ में आने वाली बाढ़ की रोकथाम के लिए सोमवार को मंत्रालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में गढ़चिरौली जिले के संरक्षक मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि तेलंगाना में मेदिगट्टा परियोजना से पानी छोड़ते और रोकते समय इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी जानी चाहिए। इससे सिरोंचा तहसील में गोदावरी नदी के किनारे के गांवों के निवासियों को समय पर स्थलांतरित किया जा सकता है और जन धनहानि बचाई जा सकती है। एकनाथ शिंदे ने कहा कि मध्य प्रदेश में संजय सरोवर का पानी वैनगंगा, गोसीखुर्द में बढ़ता है, गोसीखुर्द बांध का पानी छोडऩा पड़ता है. नतीजतन, नदी के किनारे के वैनगंगा और प्राणहिता गांव प्रभावित होते हैं। गोसीखुर्द से पानी छोडऩे के बाद पानी को गढ़चिरौली पहुंचने में बारह से पंद्रह घंटे का समय लगता है। इसलिए, मध्य प्रदेश और तेलंगाना सरकार को गढ़चिरौली जिला प्रशासन को पानी छोड़ते और रोकते समय सूचित करना चाहिए। तेलंगाना प्रशासन और हमारे प्रशासन के बीच समन्वय की जरूरत है। शिंदे ने कहा कि पिछले साल अचानक पानी छोड़े जाने और जिला प्रशासन को पूर्व सूचना न मिलने के कारण गोसीखुर्द में जलस्तर बढ़ गया और विदर्भ में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ। हिन्दुस्थान समाचार/राजबहादुर
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