नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में एक बार फिर तेज प्रताप यादव को लेकर हलचल तेज हो गई है। रविवार 8 फरवरी को सोशल मीडिया पर यह चर्चा फैल गई कि तेज प्रताप यादव को बेटी हुई है और अनुष्का यादव ने बच्ची को जन्म दिया है, जिस पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सार्वजनिक रूप से बधाई तक दे डाली। अफवाहों के बढ़ने के बाद तेज प्रताप यादव ने बीती रात 8:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया और साफ कहा कि अनुष्का से उनका कोई संबंध नहीं है, बेटी होने की बात पूरी तरह झूठी है और वे इस मामले में कोर्ट जाएंगे। इस पूरे विवाद के बीच जेडीयू की भी एंट्री हो गई है, जहां पार्टी ने सीधे तौर पर तेज प्रताप नहीं बल्कि तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए राजनीतिक तंज कसे हैं, जिससे मामला अब निजी अफवाह से निकलकर सियासी बहस में बदलता दिख रहा है।
जेडीयू का तंज: तेजस्वी से असहज है परिवार और पार्टी
सोमवार 9 फरवरी को जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने तेज प्रताप विवाद के बहाने आरजेडी के अंदरूनी हालात पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप यादव ने अपने वैवाहिक संबंधों को लेकर सफाई दे दी है, लेकिन असली मुद्दा आरजेडी के भीतर तेजस्वी यादव के खिलाफ बढ़ता असंतोष है। राजीव रंजन के मुताबिक तेज प्रताप यादव, रोहिणी आचार्य और परिवार के अन्य सदस्यों में बेचैनी साफ दिखती है, वहीं पार्टी के भीतर रमीज और संजय यादव जैसे नेताओं के खिलाफ भी नाराजगी बढ़ रही है। जेडीयू प्रवक्ता ने दावा किया कि इन हालातों से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि तेजस्वी यादव के व्यवहार को लेकर न सिर्फ परिवार, बल्कि पार्टी भी असहज महसूस कर रही है, और यही आरजेडी की अंदरूनी कलह को उजागर करता है।
जेडीयू की नसीहत: तेजस्वी के नेतृत्व पर मंथन जरूरी
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने आरजेडी के हालिया प्रदर्शन पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि पार्टी का निराशाजनक नतीजा किसी से छिपा नहीं है, क्योंकि आरजेडी बहुत मुश्किल से सिर्फ 25 सीटें जीत पाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही सिलसिला चलता रहा, तो आने वाले वर्षों में पार्टी के लिए दो अंकों तक पहुंच पाना भी चुनौती बन जाएगा। राजीव रंजन ने आरजेडी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे गंभीरता से सोचें कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी को गुमनामी के अंधेरे में जाने से कैसे बचाया जाए, क्योंकि मौजूदा हालात पार्टी के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं दे रहे हैं।
पुराना विवाद, नई सियासी हलचल
तेज प्रताप यादव के ताजा बयान के बाद भले ही सियासी हलचल तेज हो गई हो, लेकिन अब सबकी नजर इस पूरे मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी है। गौर करने वाली बात यह है कि अनुष्का से जुड़े मामले के सामने आते ही लालू यादव ने खुद तेज प्रताप को पार्टी से निष्कासित कर दिया था, जिसके बाद उन्हें परिवार से भी अलग होना पड़ा। इसी राजनीतिक और पारिवारिक दूरी के बीच तेज प्रताप ने अपनी अलग पार्टी बनाई और 2025 में महुआ से चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन वहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में एक बार फिर उनका नाम सुर्खियों में है और सवाल उठ रहे हैं कि यह विवाद उनके राजनीतिक भविष्य को किस दिशा में ले जाएगा।




