नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । प्रसिद्ध रामकथा वाचक और पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वृंदावन स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर उठाए गए कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सरकार द्वारा मंदिर के लिए एक ट्रस्ट बनाए जाने और बांके बिहारी कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने साफ शब्दों में असहमति जताई। रामभद्राचार्य ने कहा, “मैं मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने के सरकार के फैसले से सहमत नहीं हूं।” उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब मस्जिद या चर्च का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता, तो फिर मंदिर के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है?”
“सरकार मंदिरों का धन जब्त क्यों करना चाहती है?”
दरअसल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य मंगलवार को वृंदावन स्थित तुलसी पीठ छत्तीसगढ़ कुंज में श्रीमद्भागवत कथा का एक सप्ताहिक पाठ करने पहुंचे थे। इसी दौरान संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा कि सरकार मंदिरों को अपने नियंत्रण में क्यों लेना चाहती है और उनका धन क्यों जब्त करना चाहती है, जबकि वह किसी मस्जिद या चर्च का अधिग्रहण नहीं कर सकती।”
रामभद्राचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार द्वारा मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाए जाने के फैसले से सहमत नहीं हैं। उन्होंने इस कदम को धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप बताया। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सरकार ने अध्यादेश लाकर मंदिर के लिए एक ट्रस्ट बनाने और कॉरिडोर के निर्माण की योजना बनाई है, ताकि दर्शन, सुरक्षा और सुविधाएं बेहतर की जा सकें।
रामभद्राचार्य का सख्त संदेश
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सनातन धर्म के विरोध करने वालों के प्रति कड़ा रुख अपनाने का संकल्प जताया है। उन्होंने कहा, “जो लोग सनातन धर्म का विरोध करेंगे, उन्हें उचित और कठोरतम प्रसाद देंगे।” धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह विषय बहुत संवेदनशील है और इस पर संयम से काम लेना चाहिए। रामभद्राचार्य ने युवतियों को लक्ष्मीबाई जैसे वीरांगना बनने की प्रेरणा देने पर जोर दिया। मंदिरों के अधिग्रहण को लेकर उन्होंने कहा, “जब मस्जिद और चर्च का अधिग्रहण नहीं हो सकता, तो मंदिर का भी अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। हम इसका विरोध करते हैं।” श्री कृष्ण जन्मस्थान के मामले में उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर गवाही देने आएंगे और अपने उत्तर से सभी को चुप कर देंगे। रामभद्राचार्य पहले भी राम जन्म भूमि मंदिर के लिए गवाही दे चुके हैं।





