नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने साल 2026 की दमदार शुरुआत करते हुए बड़ा इतिहास रच दिया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सोमवार सुबह 10:17 बजे PSLV-C62 रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट EOS-N1 (अन्वेषा) के साथ कुल 16 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह मिशन सिर्फ एक सामान्य लॉन्च नहीं, बल्कि भारत की रक्षा, तकनीक और अंतरिक्ष क्षमता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
देश का सबसे अहम डिफेंस सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ हुआ लॉन्च
EOS-N1 जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए तैयार किया गया है। यह करीब 400 किलोग्राम वजन का हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जो 12 मीटर रेजोल्यूशन के साथ बेहद साफ तस्वीरें लेने में सक्षम है। इस सैटेलाइट का इस्तेमाल सीमा निगरानी, दुश्मन गतिविधियों पर नजर कृषि आकलन, शहरी विकास की मैपिंग, पर्यावरण पर नजर रखने जैसे कामों में किया जाएगा। PSLV-C62 रॉकेट ने सभी 16 सैटेलाइट्स को 505 किलोमीटर ऊंची सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया। यह इसरो की 64वीं PSLV उड़ान थी, जिसे PSLV-DL वैरिएंट से लॉन्च किया गया। इस मिशन की एक बड़ी खासियत है OrbitAid Aerospace का AayulSAT। यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स को ईंधन भरने (In-Orbit Refueling) की तकनीक दिखाएगा। यह भारत का पहला कॉमर्शियल इन-ऑर्बिट डॉकिंग और रिफ्यूलिंग इंटरफेस है, जिससे भविष्य में सैटेलाइट्स की उम्र बढ़ेगी और स्पेस कचरा कम होगा। हैदराबाद की कंपनी द्वारा विकसित MOI-1 सैटेलाइट भी इस मिशन का हिस्सा है। यह दुनिया का सबसे हल्का स्पेस टेलीस्कोप लेकर गया है और अब एक्टिव होकर कम्युनिकेशन कर रहा है। यह यूजर्स को रीयल-टाइम आपदा विश्लेषण के लिए अंतरिक्ष में AI प्रोसेसिंग पावर किराए पर लेने की सुविधा देगा।
विदेशी सैटेलाइट भी बने मिशन का हिस्सा
इस मिशन में भारत के अलावा मॉरीशस, लक्ज़मबर्ग, UAE, सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के कई कमर्शियल और रिसर्च सैटेलाइट भी शामिल हैं। इससे ग्लोबल स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में भारत की मजबूत स्थिति और पुख्ता हुई है। PSLV को इसरो का वर्कहॉर्स कहा जाता है। इसी रॉकेट ने चंद्रयान-1 मंगल ऑर्बिटर मिशन आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशन सफल किए हैं। साल 2017 में एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड भी PSLV के नाम है। गौरतलब है कि मई 2025 में PSLV-C61 मिशन असफल रहा था। ऐसे में यह सफल लॉन्च इसरो के लिए बेहद खास और मनोबल बढ़ाने वाला है। इस मिशन की कुल अवधि लगभग 1 घंटा 48 मिनट रही। PSLV-C62 की इस कामयाबी के साथ भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह न सिर्फ स्पेस टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद लॉन्च पार्टनर भी बन चुका है। डिफेंस सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ की लॉन्चिंग से भारत की सुरक्षा क्षमता को भी बड़ी मजबूती मिली है।




