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Monday, March 16, 2026
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Iran presidential elections: उदारवादी नेता मसूद पजशकियान बने ईरान के नए राष्ट्रपति, हिजाब कानून के हैं विरोधी

ईरान में हुए राष्ट्रपति चुनाव में उदारवादी नेता मसूद पजशकियान ने जीत दर्ज की है। उन्हें हिजाब विरोधी माना जाता है। पजशकियान ने कट्टरपंथी नेता सईदी जलीली को 30 लाख वोटों से हराया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इरान के उदारवादी नेता मसूद पजशकियान ने ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी व कट्टरपंथी नेता सईद जलीली को 30 लाख वोटों से हरा दिया। मसूद पजशकियान (Masoud Pezeshkian) इरान के 9वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। 

इब्राहिम रईसी की मौत के बाद हुए राष्ट्रपति चुनाव

बता दें कि इस साल फरवरी में ही ईरान में राष्ट्रपति के चुनाव हुए थे। जिसमें इब्राहिम रईसी देश के राष्ट्रपति बने थे, लेकिन 19 मई को एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में रईसी की मौत हो गई। जिसके बाद फिर से चुनाव कराए गए। जिसमें मसूद पजशकियान को जीत मिली है। इस चुनाव में जहां मसूद को 1.64 करोड़ वोट मिले। तो वहीं जलीली को 1.36 करोड़ वोट मिले। 

मसूद पजशकियान एक उदारवादी नेता हैं

मसूद पजशकियान को ईरान में एक उदारवादी और आधुनिक नेता माना जाता है। वो सर्जन रह चुके हैं और इस समय देश के स्वास्थ्य मंत्री हैं। पजशकियान हमेशा से हिजाब के विरोधी रहे हैं। उन्होंने चुनाव से पहले राजनीतिक भाषणों में कई बार हिजाब का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि ये मॉरल पुलिसिंग के खिलाफ हैं। 

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में लागू हुआ हिजाब कानून

ईरान हमेशा से इतना कट्टरपंथी देश नहीं था। साल 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान में हिजाब का कानून लागू हुआ। कुछ समय बाद ही ईरान की महिलाएं हिजाब का विरोध करती रही। कुछ साल पहले से हिजाब के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन काफी बढ़ गया। इस चुनाव में भी हिजाब का मुद्दा खूब छाया रहा। हिजाब का विरोध कर रही 22 साल की महसा अमीनी की मौत के बाद ईराम में कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे। 

सुप्रीम लीडर से अलग है पेजेशकियान की विदेश नीति

ईरान के होने वाले राष्ट्रपति पेजेशकियान की विदेश नीति ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई से अलग है। खामेनेई की विदेश नीति जहां पश्चिम और अमेरिका के खिलाफ रही है। वहीं नए राष्ट्रपति हमेशा से बातचीत की वकालत करते आए हैं। पेजेशकियान ने चुनाव के दौरान ईरान को दुनिया के लिए खोलने का वादा किया था। उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ संबंध को दोबारा स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाने का वादा किया था। हालांकि विदेश नीति पर अंतिम फैसला सुप्रीम लीडर का होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि खामेनेई, पेजेशकियान की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।

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