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दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव को 250 बेड वाले अस्पताल प्रोजेक्ट की मानिटरिंग के निर्देश

नई दिल्ली, 28 मई (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे द्वारका के ढाई सौ बेड वाले इंदिरा गांधी अस्पताल के प्रोजेक्ट की हर हफ्ते मानिटरिंग करें। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने ये आदेश जारी किया। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि अस्पताल का निर्माण कार्य लॉकडाउन होने की वजह धीमा पड़ गया है। अभी इसकी तीन मंजिलें बनकर तैयार हैं। इसे सातवीं मंजिल तक बनाना है, जिसके बाद इस अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि 10 जून तक 65 बेड के साथ ओपीडी ब्लॉक और दो सौ अतिरिक्त बेड की क्षमता के साथ अस्पताल काम करने लगेगा। मेहरा ने कहा कि अस्पताल का चौथा और पांचवा फ्लोर शुरू होने के बाद 236 बेड के साथ काम करना शुरू कर देगा। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक और पीएसए प्लांट लगाए जाएंगे और 31 अगस्त तक 970 बेड उपलब्ध होंगे। याचिकाकर्ता वकील वाईपी सिंह ने कहा कि अस्पताल को शुरू करने में हो रही देरी के मामले में दिल्ली सरकार की मंशा साफ नहीं है। वो ये क्यों नहीं बता रही है कि सितंबर 2019 तक इस अस्पताल को 1241 बेड की सुविधा शुरू हो जानी थी, वह क्यों नहीं हुई। तब मेहरा ने कहा कि दिल्ली सरकार की कोशिश है कि जब तीसरी लहर आएगी तो ये अस्पताल तैयार रहे। अगर याचिकाकर्ता इस तरह पोस्टमार्टम करेंगे तो इससे कुछ भी हासिल नहीं होगा। इस पर जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि 1270 बेडों में से हर महीने और हर चरण में आप कितने आईसीयू वेंटिलेटर के साथ देंगे। तब मेहरा ने इस सवाल का जवाब देने के लिए समय की मांग की। तब जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि बेड को बढ़ाने के साथ साथ आईसीयू और वेंटिलेर भी बढ़ाने थे। उसके बाद कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को इस अस्पताल के निर्माण कार्य की मानिटरिंग हर हफ्ते करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर आदेश को लागू करने में कोई भी कोताही हुई तो जरूरी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पिछले 12 मई को कोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस बात पर फटकार लगाई थी कि जिन अस्पतालों की इमारत तैयार है, दिल्ली सरकार उन अस्पतालों को शुरू नहीं कर रही है और अस्थायी अस्पताल बेड तैयार किए जा रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ संजय/ पवन

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