नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। दूषित पेयजल के कारण 6 महीने के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। यह बच्चा अपने माता-पिता के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था, क्योंकि 10 साल की मिन्नतों और दुआओं के बाद परिवार को बेटा मिला था।
10 साल बाद मिला बेटा, 6 महीने में छिन गया
नई बस्ती क्षेत्र के मराठी मोहल्ला में रहने वाले सुनील साहू और साधना साहू की शादी 2014 में हुई थी। दंपती की पहले से 10 साल की एक बेटी है। शादी के करीब 11 साल बाद साधना ने बेटे अव्यान को जन्म दिया। लेकिन किसे पता था कि यह खुशी सिर्फ 6 महीने ही टिकेगी।
उल्टी-दस्त से बिगड़ी हालत, रास्ते में तोड़ा दम
मां साधना साहू ने बताया कि बच्चे को अचानक उल्टी और दस्त शुरू हो गए। पहले निजी क्लीनिक में दिखाया गया, दवा भी दी गई। 29 दिसंबर की रात बच्चे की हालत और बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी सांसें टूट गईं। साधना साहू का आरोप है कि इलाके में कई दिनों से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा था। ब्रेस्ट फीडिंग से दूध पूरा नहीं मिल पा रहा था, इसलिए वे बाहर से लाए गए दूध में नल का पानी मिलाकर बच्चे को पिलाती थीं। यही दूषित पानी मासूम की मौत की वजह बना। इतना ही नहीं, उनकी 10 साल की बेटी को भी पेट दर्द की शिकायत है, जिससे परिवार डरा हुआ है।
इलाके में दहशत, 27 अस्पतालों में 149 मरीज भर्ती
इंदौर में दूषित पानी से हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। फिलहाल शहर के 27 अस्पतालों में 149 मरीजों का इलाज चल रहा है। भागीरथपुरा इलाके में एक ही दिन में 38 मरीज सामने आए, जिनमें से 10 को गंभीर हालत में रेफर किया गया।
मां का दर्द: “मेरा बच्चा चला गया…”
रोते हुए साधना साहू ने कहा,“मेरा बच्चा तो चला गया, लेकिन डर है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो न जाने कितने और मासूम ऐसे ही चले जाएंगे। उनका दर्द सुनकर पूरा मोहल्ला गमगीन है।
सरकार एक्शन में, अफसर निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं। नगर निगम ने जोनल अधिकारी और सहायक यंत्री को निलंबित कर दिया है। मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
इंदौर हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने दो दिन में रिपोर्ट तलब की है और निर्देश दिए हैं कि सभी पीड़ितों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाए।





