चेन्नई, 1 फरवरी (आईएएनएस)।भारत के अंतरिक्ष विभाग ने वित्त वर्ष 2022-23 में अपनी वाण्ििज्यक प्रक्षेपण सेवाओं से 219 करोड़ रुपए के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है और उसकी योजना अपने रॉकेटों की मदद से 10 उपग्रहों को कक्षाओं में स्थापित करने की है। अंतरिक्ष विभाग ने रिमोट सेंसिंग डेटा और डेटा उत्पादों की बिक्री से 11 करोड़ रुपये के राजस्व का भी लक्ष्य रखा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को संसद में पेश किए गए बजट के अनुसार, अंतरिक्ष विभाग वित्त वर्ष 2023 के दौरान 10,534.5 करोड़ रुपये के प्रतिष्ठित गगनयान ,भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन, के लिए दो रॉकेट लॉन्च परीक्षण को पूरा करने का लक्ष्य बना रहा है। सरकार ने कहा कि वर्ष के दौरान, पांच उपग्रहों को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी)/ रॉकेट, दो उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) के साथ, एक को जीएसएलवी-एमके तीन रॉकेट, और दो उपग्रहों को नए छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के साथ लॉन्च किया जाएगा। अंतरिक्ष विभाग और उसकी शाखाएं 2022-23 के दौरान सामाजिक/वाणिज्यिक और अन्य उद्देश्यों के लिए 30 प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य बना रही हैं। अगले वित्त वर्ष में एक अर्थ ऑब्जर्वेशनल और एक नेविगेशन उपग्रह को लॉन्च किया जाएगा। मानव अंतरिक्ष उड़ान रॉकेट की क्रू एस्केप प्रणाली और पैराशूट प्रणाली की योग्यता और सत्यापन का 48.5 प्रतिशत हिस्सा अगले वर्ष के लिए पूरा हो जाएगा होगा। 2022-23 के दौरान भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए तैयारी 50 प्रतिशत की क्षमता हासिल कर चुकी होगी। अंतरिक्ष विभाग ने 2021-22 के 12,642 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 13,700 करोड़ रुपये का बजट आवंटन मांगा है। –आईएएनएस जेके





