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Monday, March 2, 2026
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India France Rafale Deal: इंडियन एयरफोर्स को चाहिए 114 राफेल, भारत में ही होंगे तैयार? जानिए क्यों की डिमांड

भारतीय वायुसेना ने 114 राफेल फाइटर जेट देश में बनाने का प्रस्ताव दिया है। 2 लाख करोड़ की ये डील मेक इन इंडिया के तहत सबसे बड़ी रक्षा सौदा होगी।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय वायुसेना (IAF) ने सरकार से 114 राफेल फाइटर जेट की मांग की है। खास बात यह है कि इन्हें भारत में ही बनाया जाएगा। अगर सरकार मंजूरी देती है तो करीब 2 लाख करोड़ रुपये का यह सौदा भारत के इतिहास की सबसे बड़ी डिफेंस डील होगी। भारतीय वायुसेना के पास इस समय स्क्वाड्रन की कमी है। एक स्क्वाड्रन में 18-20 फाइटर जेट होते हैं। 114 नए राफेल आने से 5-6 नई स्क्वाड्रन खड़ी हो सकेंगी। इससे वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

भारत-फ्रांस के बीच होगा बड़ा करार

यह प्रोजेक्ट भारत और फ्रांस के बीच गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट (G2G) डील के जरिए पूरा होगा। फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट (Dassault) भारत में किसी स्वदेशी कंपनी के साथ मिलकर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। भारत में बनने वाले राफेल जेट्स में करीब 60% स्वदेशी हथियार और उपकरण लगाए जाएंगे।

क्यों चुना गया राफेल?

2016 में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल खरीदे थे। ये विमान आधुनिक मिसाइलों मिटयोर, मीका और स्कैल्प से लैस हैं। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए इन्हीं राफेल का इस्तेमाल किया गया। इसी को देखते हुए सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ मॉडल पर और राफेल बनाने का फैसला लिया है। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने से पहले इसे कई चरणों से गुजरना होगा।

वित्त मंत्रालय की स्वीकृति

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी रक्षा खरीद परिषद की हरी झंडी संभव है कि शुरुआती जरूरत पूरी करने के लिए कुछ विमान सीधे फ्रांस से भी खरीदे जाएं। इसी साल अप्रैल में भारत ने नौसेना के लिए फ्रांस से 26 राफेल मरीन वर्जन खरीदने का सौदा किया था। इन्हें स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा। इस नई डील के बाद वायुसेना का पुराना MRFA (मीडियम वेट फाइटर एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट लगभग खत्म माना जा रहा है। पहले उसमें कई विदेशी कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाली थीं। अब सरकार ने सीधा फ्रांस से करार करने का रास्ता चुना है। अगर सरकार से हरी झंडी मिलती है, तो यह डील न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में रक्षा उत्पादन को भी नई उड़ान देगी।

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