back to top
21.1 C
New Delhi
Wednesday, March 4, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

”किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रहना चाहिए”, साउथ चाइना सी पर राजनाथ सिंह का चीन को कड़ा संदेश

कुआलालंपुर में ADMM-प्लस मीटिंग में राजनाथ सिंह ने साउथ चाइना सी में चीन की दादागीरी को लेकर अहम बयान दिया है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन की बढ़ती दादागीरी के बीच भारत ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को किसी भी तरह की जबरदस्ती या दबाव से मुक्त रहना चाहिए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुई 12वीं ASEAN डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस (ADMM-Plus) में भारत की ओर से यह बात कही।

ADMM-प्लस में भारत का रुख साफ

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत शुरुआत से ही ADMM-प्लस का सक्रिय और रचनात्मक भागीदार रहा है। उन्होंने कहा कि यह मंच भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और इंडो-पैसिफिक विजन का अहम हिस्सा है। भारत का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र खुला (Open) समावेशी (Inclusive) और नियमों पर आधारित (Rule-Based) होना चाहिए, जहां सभी देशों के लिए समान अवसर और सुरक्षा की गारंटी हो।

”भारत और ASEAN का रिश्ता सिर्फ रणनीतिक नहीं, विश्वास पर आधारित है”

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और ASEAN देशों के बीच संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी नहीं हैं, बल्कि साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2022 में भारत-ASEAN साझेदारी को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया था, जो दोनों के बीच बढ़ते सहयोग का सबूत है। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) का उल्लेख करते हुए कहा,“भारत हमेशा कानून के राज, नेविगेशन की स्वतंत्रता और ओवरफ्लाइट की आजादी का समर्थन करता है। हमारा उद्देश्य किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा के लिए है। उनका यह बयान साउथ चाइना सी में चीन की आक्रामक नीतियों और अन्य देशों की नौसेनाओं को रोकने के उसके प्रयासों के बीच आया है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है। भारत का दृष्टिकोण Principle-Driven है, Transactional नहीं चीन के रक्षा मंत्री डॉन्ग जून के बगल में बैठे राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत ADMM-प्लस में अपनी भूमिका सहयोग और साझेदारी की भावना से निभाता है। हमारा दृष्टिकोण लेन-देन आधारित नहीं, बल्कि सिद्धांतों पर आधारित और दीर्घकालिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रहना चाहिए।

Advertisementspot_img

Also Read:

पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब पर संसद में बवाल, जानिए कौन हैं जनरल मनोज मुकुंद नरवणे?

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद...
spot_img

Latest Stories

कुछ देशों में होली पर रंग खेलने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई, जानिए कौन से हैं वो देश?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में होली सिर्फ एक त्योहार...

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण और होली का संयोग, जानें सूतक में किन कार्यों से रहें दूर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन पूर्णिमा पर जहां एक ओर...

Vastu Tips: घर में शांति बनाए रखने के लिए ये वास्तु उपाय, बनने लगेंगे सारे काम

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। जीवन में सुख समृद्धि अथवा...

Holi Special: गुझिया तलते वक्त क्यों फटती है? जानें आसान समाधान, इस खास रेसिपी को अपनाएं

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। होली के त्योहार पर गुझिया सबसे...

CIBIL में फंसा लोन स्टेटस, अपनाएं ये स्मार्ट स्टेप्स और बचाएं अपना क्रेडिट स्कोर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर आपने अपना लोन पूरी तरह...