नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अब आपका पता और लोकेशन की पहचान दशकों पुराने सालो से शुरू पोस्टल इंडेक्स नंबर (PAN) कोड से ही नहीं बल्कि डिजिटल पिन (Digital Pin) या डिजिपिन (Digipin) से भी होगी। भारतीय डाक विभाग अब एक नया डिजिटल एड्रेसिंग सिस्टम लॉन्च करने की तैयार कर रहा है। डिजिपिन तैयार करने एवं उसके अमल के लिए विभाग अपनी तैयारी में जुट गया है।
यह सिस्टम DIGIPIN (डिजिपिन) खासतौर पर किसी भी जगह की सटीक लोकेशन का पता लगान के लिए उपयुक्त है। इसे IIT हैदराबाद और इसरो(ISRO) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की मदद से तैयार किया गया है, चलिए जानते हैं डिजिपिन से जुड़ी खास बातें।
डिजिपिन यानी डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर, एक यूनिक 10-अंकों वाला कोड होता है जो किसी भी प्रॉपर्टी की सटीक लोकेशन या पते को बताता है। जबकि मौजूदा पिन कोड किसी बड़े क्षेत्रों को कवर करता है, डिजिपिन डायरेक्ट एक 4 मीटर x 4 मीटर के ग्रिड की पहचान करने में सक्षम है।
यह सिस्टम एक ओपन-सोर्स है, यानी इसे कोई भी उपयोग कर सकता है। ये लोकेशन के अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) के तौर पर एक खास अल्फान्यूमेरिक कोड (Alphanumeric Code) बनाता है। पूरे भारत को छोटे-छोटे ग्रिड में बाँटकर हर एक कोड अलग से तय किया गया है।
इस योजना के पीछे भारतीय डाक विभाग का उद्देश्य है कि इसके जरिए Address-as-a-Service (AaaS) सुविधा मुहैया कराई जाएगी। जिससे यूज़र्स, सरकारी एजेंसियां और प्राइवेट कंपनियां सभी को एड्रेस से जुड़ी सुविधाएं आसानी से मिल सकें। इसकी घोषणा 27 मई 2025 को आधिकारिक तौर पर की गई थी।
अपना DIGIPIN कैसे पाएं
- अगर आप भी अपना डिजिपिन बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको ‘Know Your DIGIPIN’ पोर्टल पर जाना होगा –
- https://dac.indiapost.gov.in/mydigipin/home
- यहाँ आप अपने घर या स्थान को मैप पर लोकेट करें और अपना कोड बना सकते हैं।
- सही डिजिपिन पाने के लिए आपके पास ऐसा डिवाइस होना चाहिए जिसमें GNSS (ग्लोबल लेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) हो, ताकि आपकी सटीक लोकेशन (Latitude-Longitude) मिल सके। उसी से ये 10 कैरेक्टर वाला कोड तैयार होता है।
वही, दूसरी ओर डाक विभाग एक मोबाइल ऐप भी बनाने की तैयारी कर रहा है, जिससे लोग आसानी से अपना डिजिपिन देख और इस्तेमाल कर सकें। साथ ही, इसका कोडिंग सिस्टम भी पब्लिक डोमेन में लाया जाएगा। ताकि कोई भी इसे जान-समझ कर इसका इस्तेमाल कर सके।
DIGIPIN और PIN कोड में क्या फर्क है
पिन कोड एक मोहल्ला या पूरा गांव जैसे किसी बड़े हिस्से को दिखाता है। लेकिन डिजिपिन सीधा एक छोटी सी जगह, करीब 4 मीटर x 4 मीटर के क्षेत्र के पते की पहचान करता है। इसका मतलब है कि लोकेशन की पहचान काफी ज्यादा सटीक हो जाती है।
क्या DIGIPIN आने से पुराना एड्रेस हटा जाएगा
ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा। डिजिपिन, पुराने एड्रेस को नही हटाएगा ये बस एक डिजिटल लेयर के तौर पर काम करेगा, जिससे किसी भी जगह की पहचान और ज्यादा पक्की हो सके।
क्या DIGIPIN में आपकी पर्सनल जानकारी जुड़ेगी
बिलकुल नहीं। डिजिपिन में सिर्फ आपकी जगह की लोकेशन की जरूरत होती है। इसमें कोई भी व्यक्तिगत जानकारी नहीं ली जाती।




