नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार को भारत के 52वें प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में शपथ ली। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने जस्टिस संजीव खन्ना की जगह ली है, जो मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए।
डॉ. आंबेडकर को दिया अपना प्रेरणास्रोत होने का श्रेय
जस्टिस गवई ने एक बार कहा था कि अगर संविधान निर्माता डॉ. बीआर आंबेडकर न होते, तो वह कभी इस ऊंचे पद तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने बताया था कि कैसे एक झुग्गी बस्ती में पढ़ाई करके वह इस पद तक पहुंचे। अप्रैल 2024 में एक भाषण में उन्होंने अपने सफर का ज़िक्र करते हुए ‘जय भीम’ के नारे के साथ भाषण समाप्त किया था। जस्टिस गवई अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले देश के दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं। उनसे पहले जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन 2007 में इस पद पर नियुक्त हुए थे। सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के बाद से अब तक केवल सात जज अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से रहे हैं।
कई अहम फैसलों में रहे शामिल
जस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक मामलों की सुनवाई की। इनमें न्यूज़क्लिक मामले, मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी, बुलडोज़र कार्रवाई पर रोक, आरक्षण में आरक्षण, और राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाली से जुड़े फैसले शामिल हैं। उन्होंने साफ कहा था कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी की संपत्ति तोड़ना कानून के खिलाफ है। जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उन्होंने अपना बचपन एक झुग्गी बस्ती में बिताया और नगर पालिका स्कूल में मराठी माध्यम से पढ़ाई की। बीकॉम के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और 25 साल की उम्र में वकालत शुरू की।
राजनीति से गहरा जुड़ाव रहा परिवार का
जस्टिस गवई के पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई महाराष्ट्र के वरिष्ठ राजनेता थे। वे विधान परिषद, लोकसभा, राज्यसभा के सदस्य रहे और बिहार, सिक्किम व केरल के राज्यपाल भी बने। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) की स्थापना की थी। जस्टिस गवई को 2001 में जज बनने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन प्रक्रिया में देरी हुई। उन्होंने दो साल बाद 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट में एडिशनल जज के रूप में शपथ ली। 2005 में उन्हें स्थायी जज बनाया गया। बाद में उन्होंने नागपुर बेंच में कार्य किया ताकि अपने बीमार पिता की देखभाल कर सकें। उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के दौरान कॉलेजियम ने कहा था कि यह नियुक्ति अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे लगभग एक दशक बाद सुप्रीम कोर्ट में फिर से इस वर्ग से कोई जज शामिल हुआ। राहुल गांधी के केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई ने खुद बताया था कि उनके परिवार का कांग्रेस से संबंध रहा है। उन्होंने पारदर्शिता दिखाते हुए पूछा था कि क्या उन्हें इस केस की सुनवाई से हटना चाहिए, लेकिन किसी पक्ष ने आपत्ति नहीं जताई। बाद में उन्होंने राहुल गांधी को राहत देने वाला फैसला सुनाया।





