नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत और अमेरिका ने आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए एक इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट का ढांचा तैयार किया है। दोनों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह समझौता भविष्य में होने वाले बड़े बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) की दिशा में अहम कदम है। इसका मकसद बाजार तक बेहतर पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
कई भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ घटकर 18%
नई व्यवस्था के तहत अमेरिका अब भारत से आने वाले कई सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% करेगा। इसमें टेक्सटाइल, परिधान, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक-रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में फायदा मिलेगा।
पीयूष गोयल बोले- समझौता निष्पक्ष और संतुलित
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यह समझौता पूरी तरह संतुलित है और भारत की संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि मूंगफली, शहद, माल्ट, एथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि घरेलू उत्पादकों के हित सुरक्षित रहें।
“किसानों के खिलाफ नहीं, उनके हित में है डील”
पीयूष गोयल ने आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग किसानों के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं। उनके मुताबिक इस समझौते में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो। सरकार ने साफ किया कि भारत अमेरिकी सामानों पर टैरिफ धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से कम करेगा। एयरक्राफ्ट पार्ट्स, चिप्स, सेमीकंडक्टर मशीनरी और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उत्पाद भारतीय उद्योग के लिए फायदेमंद बताए गए हैं। वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत डेयरी, पोल्ट्री और मीट उत्पादों पर किसी भी तरह की रियायत नहीं देगा। साथ ही जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थों को भारतीय बाजार में अनुमति नहीं मिलेगी।
”किसानों, MSME और हस्तशिल्प क्षेत्र को नुकसान नहीं”
सरकार का दावा है कि इस समझौते से किसानों, MSME और हस्तशिल्प-हथकरघा क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं होगा। टेक्सटाइल, लेदर, खिलौने और खेल सामग्री जैसे सेक्टरों को अमेरिकी बाजार में बड़ा अवसर मिल सकता है। सरकार के अनुसार चाय, कॉफी, कोकोनट ऑयल, कुछ फल-सब्जियां, फार्मास्युटिकल्स, मशीनरी पार्ट्स, जेम्स-डायमंड और स्मार्टफोन जैसे कई उत्पादों पर अमेरिका में शून्य शुल्क का फायदा मिलेगा। इससे निर्यात बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।





