नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद में सर्वे और हिंसा को लेकर 29 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना और न्यायधीश पीवी संजय कुमार की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। देश के सर्वाच्च न्यायालय ने संभल जामा मस्जिद के खिलाफ चल रहे मुकदमे में निचली अदालत को आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में निचली अदालत को कहा है कि वह तब तक इस मामले में आगे की कार्रवाई न करें, जब तक कि संभल की जामा मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा सर्वेक्षण आदेश को चुनौती देने वाली याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर न हो जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को दिए ये आदेश
देश के सर्वाच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की संभल जामा मस्जिद पर निचली अदालत को आदेश देते हुए कहा कि वह इस मामले में तब तक कोई कार्रवाई नहीं करेगा, जब तक संभल की जामा मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा सर्वेक्षण आदेश को चुनौती देने वाली याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में सूचीबद्ध न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को यह भी आदेश दिया है कि एडवोकेट कमिश्नर की सर्वेक्षण रिपोर्ट को एक सील बंद कवर में रखा जाए और उसे इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका सूचीबद्ध होने तक खोला न जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी साफ किया कि उन्होंने ये आदेश संभल जामा मस्जिद विवाद के शांतिपूर्ण समाधान और संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी तनाव से बचने को लेकर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 8 जनवरी 2025 को अगली सुनवाई
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एडवोकेट कमिश्नर की सर्वेक्षण रिपोर्ट आज सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हो पाई है। रिपोर्ट पेश करने की तारीख 29 नवंबर 2024 ही थी। लेकिन एडवोकेट कमिश्नर की तरफ से कुछ और समय मांगा गया था। अब इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2025 में पेश किया जा सकता है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 8 जनवरी 2025 रखी है।





