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Thursday, March 5, 2026
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Maharashtra: महाराष्ट्र की सरकारी स्कीम में कितनी घटी महिलाओं की संख्या? सर्वे ने चौंकाया

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महाराष्ट्र में सरकारी योजनाओं को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 सामने आया है, जिसमें महिला कल्याण योजनाओं में भारी गिरावट आई है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क । 8 मार्च को अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। इससे पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को महिलाओं से जुड़ी एक रिपोर्ट के माध्यम से आंकड़े जारी किए। जो महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में महिला कल्याण योजनाओं के बारे में है। इसमें बजट में कटौती के साथ-साथ लाभार्थी महिलाओं की संख्या में भी कटौती की जानकारी सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, शक्ति सदन योजना के दायरे में आने वाली महिलाओं की संख्या में भी करीब 57 फीसदी तक कमी आई है। वहीं, महिला छात्रावासों के बजट में भी 36 फीसदी तक कटौती की गई है। पढ़िए किन योजनाओं में कितने लाभार्थियों और बजट में कितनी कमी आई।

लाभार्थियों की संख्या और बजट में कमी

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, महिला परामर्श केंद्रों के आवंटन में 69 फीसदी तक कटौती आई है। इसके अलावा, तस्करी पीड़ितों और कमजोर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएं देने वाली योजना शक्ति सदन सुविधाओं में भी कैदियों की संख्या 57 फीसदी घट गई है। वहीं, सरकारी महिला छात्रावास, आश्रय गृहों और सुरक्षा गृहों में भी सामूहिक तौर पर 2024-25 में 4527 महिलाओं की संख्या 6,654 से 32 फीसदी तक कम हुई है। इन सुविधाजनक योजनाओं के लिए जारी की जाने वाली राशि में भी 36 फीसदी तक की कटौती की गई है।

सबसे ज्यादा कटौती कहां?

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसमें सबसे ज्यादा कटौती महिला परामर्श केन्द्रों हुई है। जिसमें 69 फीसदी तक की कमी आई देखी गई है। जो 4.20 करोड़ रुपये से घटकर केवल 1.32 करोड़ रुपये रह गई है। वहीं, लाभार्थियों की संख्या में 29 फीसदी की कटौती देखी गई है। घरेलू हिंसा पीड़ितों के लिए सुरक्षा सेवाओं में लाभार्थियों की संख्या 11,722 से 9,704 तक रह गई है। जिसकी फंडिंग में 30.95 करोड़ रुपये से 24.63 करोड़ रुपये तक की कमी आई है। वहीं, कामकाजी महिलाओं के लिए सखी निवास आवास में 20 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है। इस तरह से सबसे ज्यादा गिरावट महिलाओं में आई है। 

इसके अलावा मनोधैर्य योजना में महिला लाभार्थियों की संख्या में 13 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिली है। जबकि, इसका बजट 59 फीसदी तक कमी के साथ 48 करोड़ रुपये से घटकर 19.48 करोड़ तक पहुंच गया है। सर्वे के सामने आने के बाद से इन योजनाओं में गिरावट पर कई सवाल उठ रहे हैं।

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