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Wednesday, March 11, 2026
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स्पेस में एस्ट्रोनॉट के बीमार हो जाने पर कैसे होता है इलाज, क्या इमरजेंसी करनी पड़ती है लैंडिंग?

अंतरिक्ष में किसी यात्री की अचानक से सेहत खराब हो जाएं तो वहां पर उसका इलाज कैसे होता है। क्या उसे वहीं पर मेडिसीन दी जाती है या इमरजेंसी में लैंडिंग करानी पड़ती है। आइए विचार करें।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । बीते कई दशकों से अंतरिक्ष को लेकर नई नई खोज के प्रयास किए जा रह हैं लेकिन यह अभी भी एक रहस्य ही बना हुआ है। दुनिया भर के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में नई खोज करने का प्रयास करते हैं। हाल के दिनों में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्री स्पेस में अपने मिशन के लिए गए हैं।

अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रनॉट्स के लिए पूरी सुरक्षा और सारे बंदोबस्‍त किए जाते हैं। लेकिन फिर भी एक सवाल यह है कि अगर अंतरिक्ष में किसी यात्री की अचानक से सेहत खराब हो जाए तो वहां पर उसका इलाज कैसे होता है। क्या उसे वहीं पर मेडिसीन दी जाती है, या फिर किसी तरह धरती पर वापस भेजा जाता है।

क्या अंतरिक्ष में दवाएं होती हैं?

ध्‍यान रहे कि अंतरिक्ष का वातावरण धरती से बिल्कुल अलग होता है। जब भी कोई अंतरिक्ष यात्री वहां जाता है तो वापस आने पर उसे कई तरह की कमजोरी आ जाती है और हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा, अगर कोई अंतरिक्ष में बीमार हो जाए तो क्या होता है। दरअसल, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में एक मेडिकल किट होती है, इसमें प्राथमिक देखभाल की सारी चीजें उपलब्ध होती हैं, जैसे कि उल्टी, बुखार, दर्द, सेडेटिव्स, बीपी और शुगर चेक करने की मशीनें और ऑप्शनल दवाएं होती हैं। कोई छोटा जख्म होने पर उसे साफ करने के लिए एंटीबायोटिक्स भी होती हैं। 

हर क्रू मेंबर को मिलती है ट्रेनिंग

इसके अलावा, अंतरिक्ष में जाने से पहले हर क्रू मेंबर को बेसिक ट्रेनिंग देकर भेजा जाता है, जैसे कि सीपीआर, जिससे कि वहां जरूरत पड़ने पर साथियों की मदद की जा सके। उनके साथ टीम में एक शख्स ऐसा भी होता है जो कि एक तरह से स्पेस का मेडिकल ऑफिसर होता है। उसके पास बाकी लोगों से ज्यादा ट्रेनिंग होती है और अगर कोई बड़ी इमरजेंसी न हो तो वो आसानी से उससे निपट सकता है। इसके साथ ही उनको धरती से मॉनिटर किया जाता है और यहां मौजूद डॉक्टरों की टीम उनको गाइड करती रहती है।

क्या धरती पर भेज दिया जाता है वापस?

सबसे जरुरी बात ये है कि स्पेस में किसी भी बीमार या कमजोर शख्स को नहीं भेजा जाता है। सिर्फ वो ही वहां जा सकता है, जो कि स्‍वास्‍थ के नजरिए से एकदम फिट हो। इसीलिए कुछ भी छुटपुट समस्या होने से वे आसानी से डील कर लेते हैं। लेकिन फिर भी अगर वहां सेहत बिगड़ी तो स्पेस मेडिकल टीम तुरंत देख लेती है, लेकिन अगर फिर भी मामला बिगड़ता देख और जान का जोखिम लगने पर कॉन्टिन्जेंसी रिटर्न का प्लान किया जाता है। स्पेस स्टेशन में हमेशा एक लाइफबोट स्पेसक्राफ्ट डॉक लगा होता है। इमरजेंसी की स्थिति में इससे एस्ट्रोनॉट्स को वापस भेजा जा सकता है।

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