नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जून को आपातकाल की बरसी पर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि आपातकाल लगाने वालों को संविधान के लिए अपना प्यार जताने का कोई अधिकार नहीं है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस ने किस तरह से बुनियादी स्वतंत्रताओं को नष्ट किया और संविधान को रौंदा ये सब आपातकाल के काले दिनों ने साफ साफ दिखाया। कांग्रेस के द्वारा लगायी गयी इमरजेंसी 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक चली। जिसको आज पूरे 49 साल हो गए हैं।
वह समय काफी चुनौतीपूर्ण था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल के समय पुलिस से बचने के लिए कई तरह के भेष बदले थे। मोदी के उस समय के बदले गए भेष के कई फोटों सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर मोदी आर्काइव नाम के आकउंट में शेयर किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने सोशल मीडिया एक्स के अकाउंट @narendramodi से मोदी आर्काइव नाम के अकाउंट पर इन फोटों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पीएम ने लिखा है कि “वह समय काफी चुनौतीपूर्ण था। उस समय सभी क्षेत्रों के लोग एक साथ एकत्रित हुए और लोकतंत्र पर आपातकाल के हमले का विरोध किया। “
एक्स अकाउंट पर एक कविता की कॉपी भी पोस्ट की गई है
मोदी आर्काइव सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटों को साझा किया गया है। फोटों के साथ ही मोदी आर्काइव सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर एक कविता की कॉपी भी पोस्ट की गई है। जिसमे कैप्शन में लिखा हुआ है कि अपने शब्दों में ‘आपदा में अवसर’ जिसने नरेंद्र मोदी को राजनीतिक स्पेक्ट्रम में नेताओं और संगठनों के साथ कार्य करने का मौका दिया, जिसके कारण उन्हें(नरेंद्र मोदी) अलग अलग विचारधारा और दृष्टिकोणों से रूबरू होने का अवसर मिला।
उनके भेष इस तरह के थे कि उनके सगे संबंधी भी उन्हें नहीं पहचान पाते थे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल के दौरान पुलिस से बचने के लिए कई तरह के भेष बदले। उनके भेष इस तरह के थे कि उनके सगे संबंधी भी उन्हें नहीं पहचान पाते थे। उन्होंने कभी भगवा वस्त्र पहन कर स्वामीजी का रूप धारण किया तो कभी पगड़ी पहन कर सिख का भेष धारण किया। यहां तक कि नरेंद्र मोदी ने जेल के अधिकारियों को चकमा देकर महत्वपूर्ण दस्तावेज को जेल के अंदर पहुंचाने में सफलता हासिल की थी।
उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में नियुक्त किया गया था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1974 में ही गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन के दौरान देश में हो रहे बदलाव में छात्रों की आवाज की शक्ति को देखा। नरेंद्र मोदी को आरएसएस के युवा प्रचारक के रूप में जोशीले भाषण देने के कारण युवा आंदोलन को शक्ति देने के लिए उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में नियुक्त किया गया था।
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