नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों की एंट्री फीस में बड़ी बढ़ोतरी की है। नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में जारी नई बैरियर नीति के तहत एंट्री टैक्स में करीब ढाई गुना तक इजाफा किया गया है। हालांकि, हिमाचल में पंजीकृत वाहनों को पहले की तरह एंट्री टैक्स से छूट मिलेगी।
कितनी बढ़ी एंट्री फीस?
नई दरों के मुताबिक सामान्य बाहरी वाहन 70 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है, 12+1 सवारी क्षमता वाले वाहन 110 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। हैवी वाहन 720 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये कर दिया गया है, जेसीबी और निर्माण मशीनरी 570 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये और ट्रैक्टर 70 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये तो वही डबल एक्सल बस और ट्रक 570 रुपये है. यानी की कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि अलग-अलग वाहनों की उपयोगिता और श्रेणी के आधार पर दरें तय की गई हैं। प्रदेश में कुल 55 एंट्री बैरियर हैं, जहां से बाहरी राज्यों के वाहन प्रवेश करते हैं। प्रमुख बैरियर सिरमौर के गोविंदघाट, नूरपुर के कंडवाल, ऊना के मैहतपुर, बद्दी, परवाणू और बिलासपुर के गरामोड़ा में स्थित हैं। इन सभी बैरियरों पर 1 अप्रैल से नई दरें लागू हो जाएंगी। साथ ही, शुल्क वसूली को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए फास्टैग सिस्टम भी लागू किया जाएगा।
सरकार ने क्यों लिया फैसला?
राज्य इस समय वित्तीय दबाव से गुजर रहा है। वेतन, पेंशन और विकास कार्यों के लिए सरकार को अतिरिक्त राजस्व की जरूरत है। ऐसे में एंट्री टैक्स बढ़ाकर आय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि पर्यटन और व्यापार से जुड़े वाहनों की संख्या को देखते हुए इससे नियमित आय होगी और आर्थिक संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। हर साल लाखों पर्यटक अपनी निजी गाड़ियों से यहां आते हैं। एंट्री फीस बढ़ने से यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि 170 रुपये ज्यादा बड़ी राशि नहीं है, लेकिन बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच यह अतिरिक्त खर्च जरूर है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार को संतुलित नीति अपनानी चाहिए, ताकि पर्यटकों की संख्या पर असर न पड़े।





