नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन से हालात बिगड़ गए हैं। प्रदेश की 600 से ज्यादा सड़कें और 4 नेशनल हाईवे बंद होने से सेब का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बागवानों के हजारों पेटी सेब ट्रकों और गोदामों में फंसे पड़े हैं, जिससे 5 हजार करोड़ के सेब व्यापार पर संकट मंडरा रहा है।
लाखों पेटी सेब मंडियों में फंसे
अकेले किन्नौर की टापरी मंडी में 15 हजार पेटी सेब गाड़ियों और ऑक्शन यार्ड में रुका हुआ है। मंडी, कुल्लू और चंबा में 55 हजार पेटी से ज्यादा सेब गोदाम और ट्रकों में पड़ा है। शिमला जिले में 20 से 25 लाख पेटी सेब तैयार है, लेकिन रास्ते बंद होने से बाहर नहीं जा पा रहा। कुल मिलाकर प्रदेश में 3.50 लाख से ज्यादा पेटी सेब ट्रकों और मंडियों में अटका हुआ है।
बारिश ने बिगाड़ा हाल
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि 1948 के बाद पहली बार इतनी भयंकर बारिश हुई है। इस बार 450 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज हुई, जिससे किसानों और बागवानों पर सीधा असर पड़ा। करीब 4 से 5 लाख पेटी सेब जगह-जगह फंसा हुआ है। राजस्व मंत्री जगत नेगी ने माना कि सेब मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युद्धस्तर पर सड़कों को खोलने का काम कर रही है। सेब को समय पर मंडियों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
अधिक उत्पादन की उम्मीद थी
इस साल सेब का उत्पादन पिछले तीन वर्षों की तुलना में ज्यादा होने का अनुमान था। 3 करोड़ पेटी से ज्यादा सेब बाजार में आने की उम्मीद थी। लेकिन मंडी, कुल्लू और शिमला के ऊपरी इलाकों में सड़कें बंद होने से बागवानों की मेहनत अटक गई है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन राज्य की जीडीपी का 13% हिस्सा है. प्रदेश के 6 जिलों की 17 विधानसभा सीटों पर सेब की खेती होती है और इससे करीब 6 लाख परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। लेकिन इस साल की आपदा ने सेब कारोबार की कमर तोड़ दी है।





