नई दिल्ली, 16 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा है कि भारत के उच्च शिक्षा संस्थान सिर्फ शिक्षा के केंद्र के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री शुक्रवार को लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) द्वारा "कोरोना काल के बाद अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा में अवसर" थीम पर आयोजित कांफ्रेंस को वर्चुअल तरीके से संबोधित कर रहे थे। ‘निशंक’ ने कहा कि भारत के शिक्षा संस्थानों ने इस चुनौती भरे समय में भी हार नहीं मानी और शायद ही दुनिया में ऐसा कोई अन्य देश हो जहां के शैक्षणिक संस्थानों ने राष्ट्र के कल्याण के लिए स्वयं को ऐसे माहौल में पूरी तरह से समर्पित किया हो। उन्होंने कहा कि इन विषम परिस्थितियों के बीच, हमारे सभी विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, आईआईटी संस्थानों ने आगे बढ़कर इन चुनौतियों को अवसर में बदला। वे उस समय भी लगातार रात-दिन काम करते रहे, जब देश के शेष नागरिक लॉकडाउन में थे। आईआईटी संस्थानों ने कम लागत वाले पोर्टेबल वेंटिलेटर, सस्ती और एआई-संचालित कोविड-19 टेस्ट किट, सैनिटाइजेशन ड्रोन, सस्ते और प्रभावी पीपीई किट तथा मास्क जैसे अद्वितीय इनोवेशन किए जिससे हमारे लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हुई। नई राष्ट्रीय नीति कि बात करते हुए पोखरियाल ने कहा कि यूनेस्को ने हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने कहा, "इस नीति के माध्यम से, हम दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भारत के दरवाजे खोलने में मदद करेंगे। हम दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों को भारत में नए परिसरों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसके अतिरिक्त, हम छात्रों को अध्ययन करने, क्रेडिट हस्तांतरित करने और शोधकार्य करने के लिए अधिक गतिशीलता प्रदान करेंगे। एनईपी- 2020 में भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने की परिकल्पना की गई है और इस दिशा में हम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ अन्य विदेशी भाषाएं भी सिखाएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील




