नई दिल्ली, 11 मई (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा है कि अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीज़ों के साथ तीमारदारों को रखने पर विचार होना चाहिए, क्योंकि कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं होता। सुनवाई के दौरान एमिकस क्युरी राजशेखर राव ने कहा कि 70 वर्ष से ऊपर की आयु के मरीज अपनी देखभाल नहीं कर पाते हैं। उन्होंने एक महिला बुजुर्ग मरीज के बारे में बताया जो अपने से खा तक नहीं पाती थी। उसके पास कोई तीमारदार नहीं था। अस्पताल के स्टाफ ने कहा कि उनके पास तिमारदार नहीं है। कुछ समय बाद थोड़ी देर के लिए बिजली चली गई जिससे वेंटिलेटर ने काम करना बंद कर दिया। राव ने कहा कि अमित महाजन के हस्तक्षेप के बाद एक व्यक्ति कुछ देर के लिए उस बुजुर्ग महिला के पास आया। तब जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि केवल बेड बढ़ा देने से कुछ नहिं होगा। जस्टिस सांघी ने कहा कि मरीजों को अकेले नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मरीज के परिवार के कुछ सदस्यों को या दूसरे तीमारदार को मरीज की देखरेख की अनुमति दी जा सकती है। तिमारदार को पीपीई किट समेत दूसरे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इस पर एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि स्थिति ये है कि नर्स और मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति के बावजूद मरीजों की देखभाल नहीं हो पाती है। यहां तक कि झाड़ू देने वाले और दूसरे स्टाफ भी कोरोना मरीज के आसपास नहीं जाना चाहते हैं। कोर्ट को बताया गया कि बुजुर्ग महिला की मदद के लिए कोई ब्रिगेडियर मलिक आए। उसके बाद महिला को शाम को ड्रिप दिया गया। लेकिन महिला ने रात का खाना नहीं खाया। इस पर राव ने कहा कि ऐसे मरीजों के लिए कुछ मेकानिज्म बनना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत
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