back to top
23.1 C
New Delhi
Sunday, March 15, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन नहीं मिलने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को किशोरी योजना के तहत सरकारी स्कूलों में छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन का वितरण बंद करने के लिए दिल्ली सरकार के प्रति अपना असंतोष व्यक्त किया। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन नहीं दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में जनवरी 2021 से सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे छात्राओं को समस्या हो रही है। सुनवाई के दौरान पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि जब भी कोई मौजूदा अनुबंध समाप्त हो जाए, तो स्थिति से निपटने के लिए एक नीति विकसित करें। सरकार के वकील ने सैनिटरी नैपकिन के वितरण के संबंध में पहले के एक टेंडर को रद्द करने की ओर इशारा करते हुए कहा कि एक नया टेंडर जारी किया गया है जो गर्मी की छुट्टी के बाद स्कूलों के फिर से खुलने से पहले चालू होने की संभावना है। अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के माध्यम से एक गैर सरकारी संगठन, याचिकाकर्ता सोशल ज्यूरिस्ट ने प्रस्तुत किया कि दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने किशोरी योजना योजना को अपनाया था, जिसके तहत उसके स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को उनकी पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को दूर करने के अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए सैनिटरी नैपकिन प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया था। सुविधा की बहाली के लिए प्रार्थना करते हुए, याचिकाकर्ता ने कहा कि यह छात्राओं की व्यक्तिगत स्वच्छता और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके न होने से उनके अध्ययन और उपस्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। याचिका में कहा गया है, डीओई ने सकरुलर के जरिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रमुखों को छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन वितरित करने का निर्देश दिया है। याचिका में दलील दी गई है कि छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन प्रदान नहीं करना तर्कहीन, अनुचित, मनमाना और संविधान के तहत गारंटीकृत छात्राओं के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। –आईएएनएस एकेके/एएनएम

Advertisementspot_img

Also Read:

क्या लोक अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में दी जा सकती है चुनौती? जानें कब मिलती है राहत और कौन से मामले नहीं...

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोक अदालत का फैसला आमतौर पर अंतिम माना जाता है, क्योंकि यह दोनों पक्षों की सहमति से होता है। हालांकि कुछ...
spot_img

Latest Stories

LPG, CNG और PNG में क्या होता है अंतर? जानिए रसोई से गाड़ियों तक इन गैसों का काम

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर Iran...

Solo घूमने के लिए भारत की ये बेस्ट जगहें, जहां मिलेगा सुकून

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज के समय में ज्यादातर...

Alia Bhatt Birthday: 19 की उम्र में एक्ट्रेस ने किया डेब्यू, बड़ा अनोखा रहा अब तक का फिल्मी सफर

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आलिया भट्ट सिनेमा की चर्चित...

Vastu Tips: पापमोचनी एकादशी के दिन करें ये वास्तु उपाय, घर में सुख समृद्धि की होगी वृद्धि

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। पापमोचनी एकादशी के दिन आपको...