नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के बाद, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब जिले में किसी भी तरह के कफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी गई है। गुरुग्राम की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अल्का सिंह ने फार्मासिस्टों, माता-पिता और डॉक्टरों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
कोल्ड्रिफ सिरप में मिला ज़हरीला केमिकल
स्वास्थ्य विभाग की जांच में कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रासायनिक तत्व पाया गया है। यह तत्व तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित एक कंपनी द्वारा बनाए गए सिरप में मिला था। डॉ. अल्का सिंह ने बताया DEG की मात्रा सिरप में मानक सीमा से कहीं ज़्यादा थी। यह तत्व बच्चों और बड़ों दोनों के लिए घातक साबित हो सकता है।” इस कारण स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर, डिस्ट्रीब्यूटर और अस्पतालों को निर्देश दिया है कि सिरप का बचा हुआ स्टॉक तुरंत जब्त करें और उसकी बिक्री रोक दें।
डॉक्टर की सलाह के बिना न दें कफ सिरप
CMO ने माता-पिता से अपील की है कि बच्चों को डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी कफ सिरप न दें। उन्होंने कहा कि अधिकतर बच्चों की खांसी कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। जरूरत से ज्यादा दवा देना नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि किसी भी कॉम्बिनेशन ड्रग्स या मिश्रित सिरप से बचें। अगर कोई असामान्य लक्षण या दवा से रिएक्शन दिखे, तो तुरंत डॉक्टर या स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें। फार्मासिस्टों को बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा बेचने से सख्त मना किया गया है।
अस्पतालों को मिली रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी
जिले के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि वे इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) और इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) के माध्यम से दवाओं से जुड़ी हर असामान्य घटना या बीमारी की रिपोर्ट समय पर करें। जिला स्वास्थ्य विभाग ने साफ कहा है कि अगर कोई मेडिकल स्टोर या अस्पताल इस आदेश का पालन नहीं करता, तो उसकी शिकायत राज्य दवा नियंत्रक और राज्य निगरानी इकाई को दी जाएगी, और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। डॉ. अल्का सिंह ने लोगों से कहा,“दवा हमेशा पंजीकृत डॉक्टर की सलाह से ही दें। कोई भी खांसी की दवा या सिरप खरीदने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। यह आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक केंद्र सरकार से नई गाइडलाइन जारी नहीं होती।





