नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश में जल्द ही जातिगत जनगणना शुरू होने जा रही है। सरकार ने ऐलान किया है कि आने वाले दो से तीन महीने में जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए अधिकारियों की नियुक्ति की तैयारी हो रही है। जनगणना का काम केवल पंद्रह दिन में पूरा कर लिया जाएगा।
मुस्लिमों की भी गिनी जाएगी जाति
इस बार जनगणना में धर्म के साथ-साथ जाति का भी कॉलम जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि हिंदू समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय की जातियां भी गिनी जाएंगी। मुस्लिम समाज में मौजूद विभिन्न जातियों की जानकारी भी रिकॉर्ड की जाएगी। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई योजना नहीं है।
डिजिटल तरीके से होगी जनगणना
इस बार जनगणना को आधुनिक तरीके से किया जाएगा। इसमें आधार, बायोमेट्रिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा। हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने में एक-दो साल का समय लग सकता है।
2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाए। इसके लिए पहले जनगणना, फिर परिसीमन जरूरी है। जनगणना के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा जो राज्यों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करेगा।
OBC आरक्षण की सीमा बढ़ सकती है
जातिगत जनगणना से जब सभी जातियों की संख्या सामने आएगी, तब सरकार 27% ओबीसी आरक्षण की सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकती है। फिलहाल जस्टिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले समय में इस पर चर्चा हो सकती है।
विपक्षी दलों से बात कर सकती है सरकार
जनगणना के तौर-तरीकों को लेकर सरकार सभी राजनीतिक दलों से चर्चा करने की योजना बना रही है। हालांकि, निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर सरकार फिलहाल कोई कदम नहीं उठाने के मूड में है। विपक्षी दलों के बीच उत्तर बनाम दक्षिण की बहस भी इस मुद्दे पर सामने आ सकती है। सरकार जातिगत जनगणना के जरिए देश की सामाजिक स्थिति का विस्तृत आंकड़ा जुटाना चाहती है। इसके आधार पर भविष्य में आरक्षण, महिला प्रतिनिधित्व और संसदीय क्षेत्र तय करने जैसे बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।





