नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ख्याति को और बढ़ाते हुए विज्ञान संस्थान के जैवरसायन विभाग ने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से एक करोड़ 70 लाख रुपये का अनुदान हासिल किया है। बीएचयू को मिला यह अनुदान शोध एवं शिक्षण में विभाग के उत्कृष्ठ योगदान का ताजा उदाहरण है। इस अनुदान के तहत विभाग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के ढांचे को और मजबूत करने के साथ साथ नव एवं उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकासात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक सामाजिक उत्तरदायित्व (एस.एस.आर.) को प्रोत्साहित करने तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति की ओर स्टार्ट-अप, विनिर्माण उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को आकर्षित करने की ओर कार्य किया जाएगा। जैवरसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एस. श्रीकृष्णा ने कहा कि, इस अनुदान के अंतर्गत जैव रसायन के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दिया जायेगा। इस अनुदान से एक अत्याधुनिक सेन्ट्रल इन्स्ट्रूमेन्टेशन फैसिलिटी (सी.आई.एफ.) का निर्माण किया जायेगा, जिसमें भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथी कार्यक्रम का भी सहयोग रहेगा। सी.आई.एफ. की सेवाएं हर वक्त परास्नातक एवं शोध छात्रों तथा संकाय सदस्यों के लिए उपलब्ध रहेंगी, ताकि उन्हें अर्न्तविषयी शोध के लिए अनुकूल वातावरण मिलता रहे। यह अनुदान एक खास कार्यक्रम के तहत दिया गया है और अत्यंत ही प्रतिस्पर्धी है। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में इस वर्ष इस अनुदान को प्राप्त करने वाला काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का जैवरसायन विभाग एकमात्र ऐसा विभाग है। गौरतलब है कि बीएचयू के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे पौधे की नई किस्म विकसित की है जिसकी मदद से कैंसर का उपचार संभव है। खासतौर पर सर्वाइकल कैंसर में यह औषधीय पौधा विशेष रूप से लाभकारी है। 8 वर्ष लंबी रिसर्च के उपरांत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की लैब में नैनो-बायोटेक्नोलॉजी द्वारा ऋष्यगंधा की यह नई किस्म तैयार की गई है। भारतीय आयुर्वेद के आधार पर की गई इस रिसर्च को दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा स्वीकृति दी जा रही है। कैंसर जैसे गंभीर रोग के निदान में सहायक यह पौधा सामान्य रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के शुष्क एवं गर्म स्थानों पर पाया जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक आयुर्वेदिक पद्धति में उल्लिखित ऋष्यगंधा एक ऐसा औषधीय पौधा है, जिसे सामान्य भाषा में पनीर का फूल या पनीर बंध एवं वैज्ञानिक भाषा मे विधानिया कोअगुलंस के नाम से जाना जाता है। ऋष्यगंधा को पनीर का फूल कहे जाने का कारण उसके बीजों में उपस्थित प्रोटीएज द्वारा दूध से पनीर बनाने की क्षमता होती है। –आईएएनएस जीसीबी/एएनएम





