नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मणिपुर में अगले साल राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और इस सवाल के कयास तेज हो गए हैं कि क्या भाजपा फिर से राज्य में सरकार बना पाएगी। मणिपुर के 20 से ज्यादा भाजपा विधायक हाल ही में दिल्ली पहुंचे और पार्टी ने अब विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त किया है। सूत्रों के अनुसार, अब किसी भी दिन मणिपुर में एनडीए विधायकों की बैठक हो सकती है और नए नेता का चुनाव हो सकता है, जिससे राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
मणिपुर में नई सरकार में डिप्टी सीएम की संभावना
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, मणिपुर में नई सरकार में एक डिप्टी सीएम भी हो सकता है। संभावना है कि मैतेई समुदाय से मुख्यमंत्री चुना जाएगा, जबकि कुकी समुदाय के किसी नेता को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि सरकार सभी समुदायों को साथ लेकर चल रही है। बीते वर्षों में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच तनाव और हिंसा की घटनाएं हुई थीं, इसलिए इस कदम से सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री पद के लिए बीरेन सिंह की सरकार में असेंबली स्पीकर रहे सत्यब्रत सिंह, पूर्व मंत्री टीएच बिस्वजीत सिंह और के. गोविंद दास के नाम संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं।
कुकी समुदाय की डिप्टी CM पद की मांग
मणिपुर में भाजपा के भीतर भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। सभी संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार मैतेई समुदाय के ही हैं, लेकिन कुकी विधायकों का कहना है कि उनके समुदाय का उचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यदि कुकी समुदाय को डिप्टी सीएम या अन्य महत्वपूर्ण पद नहीं मिला, तो उनके लिए सरकार का हिस्सा बनना मुश्किल हो जाएगा। इस मांग को लेकर कुकी विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व से आग्रह किया है और भाजपा अब इस पर विचार कर रही है। वहीं, कुछ विधायकों का यह भी कहना है कि मणिपुर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए, जिसकी अपनी विधानसभा हो, ताकि प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
मणिपुर में एक साल से चल रहा राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में पहली बार 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जो शुरू में केवल 6 महीने के लिए था। इसके बाद अगस्त 2025 में इसे फिर से 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया। उस समय मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में ही पद छोड़ दिया था। मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, इसलिए विधायक चाहते हैं कि कम से कम एक साल के लिए नए सिरे से सरकार का गठन हो और कुछ काम करके जनता के बीच चुनाव में जाया जाए। फिलहाल 60 सीटों वाले मणिपुर विधानसभा में भाजपा के 37 विधायक हैं, जो उन्हें सरकार बनाने में मजबूत स्थिति देते हैं।





