back to top
21.1 C
New Delhi
Thursday, March 19, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Global Temperatures: ढाई डिग्री तक बढ़ेगा धरती का तापमान! UNEP की रिपोर्ट में जलवायु संकट पर बड़ा खुलासा

दुनिया भर के देश चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन अब भी धरती को गर्म होने से नहीं रोक पा रहे हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दुनिया भर के देश चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन अब भी धरती को गर्म होने से नहीं रोक पा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की ‘एमिशन गैप रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, इस सदी के अंत तक यानी साल 2100 तक वैश्विक तापमान 2.3 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन यह अब भी पेरिस समझौते के लक्ष्य (1.5°C) से काफी ज्यादा है। रिपोर्ट साफ कहती है। अगर देशों ने अब भी ठोस कदम नहीं उठाए, तो दुनिया को भयानक जलवायु आपदाओं का सामना करना पड़ेगा।

पेरिस लक्ष्य से अब भी दूर है दुनिया

पेरिस समझौता (2015) में यह तय हुआ था कि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना होगा। लेकिन UNEP की रिपोर्ट कहती है अगर सभी देश अपनी मौजूदा जलवायु योजनाएं (NDCs) पूरी तरह लागू करें, तब भी तापमान 2.3 से 2.5°C बढ़ेगा। मौजूदा नीतियों के हिसाब से धरती 2.8°C गर्म होने के रास्ते पर है। अगले 10 सालों में तापमान अस्थायी रूप से 1.5°C से ऊपर चला जाएगा, अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो।

UNEP की चेतावनी-तीन मौके मिले, हर बार देश चूके

UNEP की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा,“पेरिस समझौते के तहत देशों को वादे निभाने के तीन मौके मिले, लेकिन हर बार वे लक्ष्य से पीछे रह गए। अब वक्त है कि बिना रुके, पूरी ताकत से उत्सर्जन घटाया जाए।” उन्होंने बताया कि भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक दबावों के बावजूद, देशों को नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना होगा, वरना हालात और बिगड़ेंगे।

देशों की जलवायु प्रतिज्ञाएं: कितने पूरे हुए वादे?

पेरिस समझौते के तहत कुल 195 देश जुड़े थे। इनमें से अब तक सिर्फ एक-तिहाई (लगभग 65 देश) ने नई या अपडेटेड राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएं (NDCs) जमा की हैं। ये देश कुल वैश्विक उत्सर्जन का 63% कवर करते हैं। बाकी देशों ने पुरानी योजनाओं को ही जारी रखा है यानी वे जलवायु कार्रवाई में पीछे हैं। विशेषज्ञों ने क्या कहा रेचल क्लीटस, Union of Concerned Scientists की निदेशक ने कहा, “ये आंकड़े सिर्फ चिंताजनक नहीं, बल्कि गुस्सा दिलाने वाले हैं। अमीर देशों की धीमी कार्रवाई और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता हमें संकट की ओर ले जा रही है। रिचर्ड ब्लैक, Amber के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा, “कुछ देशों की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं आशा दिखा रही हैं, लेकिन यह रफ्तार काफी नहीं है। वहीं कैथरीन अब्रेऊ, International Climate Policy Hub की प्रमुख ने कहा, “पेरिस समझौता विफल नहीं हो रहा, बल्कि कुछ शक्तिशाली G20 देश अपने वादों से पीछे हट रहे हैं।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

वृत्तिका नाम का मतलब-Vrittika Name Meaning

Vrittika Name Meaning वृत्तिका नाम का मतलब : Light...

एक दिन में कितनी कमाई करती है भारत सरकार? जानिए सालभर की कमाई का पूरा हिसाब

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत दुनिया की सबसे तेजी से...

सिर्फ 2 गेंदों में हैट्रिक? यह भारतीय गेंदबाज कर चुका है हैरतअंगेज कारनामा

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। IPL 2026 सीजन की शुरुआत होने...

Chaitra Navratri पर दिल्ली के इन जगहों से करें सबसे बढ़िया शॉपिंग? जानिए सारी जानकारी

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चैत्र का महीना शुरू होने...

राजनीति में कभी फुल स्टॉप नहीं होता, खरगे के बयान पर PM मोदी ने की तारीफ

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राज्यसभा में विदाई समारोह के दौरान...

The Kerala Story 2 ने दिखाया कमाल, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पंहुचा 50 करोड़ के पार

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 'द केरल स्टोरी' (The Kerala...