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Friday, March 6, 2026
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वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में पहली बार बाल और शयन भोग नहीं लगा, जानिए क्यों हुआ ऐसा

हलवाई को वेतन न मिलने से वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में टूटी परंपरा। पहली बार बिना बाल और शयन भोग के हुए ठाकुर जी के दर्शन।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक असाधारण और चिंताजनक स्थिति देखने को मिली, जब पहली बार ठाकुर बांके बिहारी को बाल भोग और शयन भोग अर्पित नहीं किया गया। हलवाई को समय पर वेतन न मिलने के कारण भोग तैयार नहीं हो सका, जिससे मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा टूट गई। इस घटना से मंदिर के गोस्वामियों और श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी गई, वहीं प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए।

बिना भोग के हुए दर्शन

श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार ठाकुर जी को दिन में चार बार भोग लगाया जाता है-सुबह बाल भोग, दोपहर राजभोग, शाम को उत्थापन भोग और रात्रि में शयन भोग। लेकिन सोमवार को सुबह का बाल भोग और रात का शयन भोग नहीं लग पाया। इसके बावजूद ठाकुर जी श्रद्धालुओं को दर्शन देते रहे, जिसने भक्तों को भावुक कर दिया।

भुगतान न होने से रुका भोग निर्माण

मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी के तहत भोग और प्रसाद निर्माण की जिम्मेदारी तय की गई है। ठाकुर जी के भोग निर्माण के लिए नियुक्त हलवाई को प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। बताया गया कि पिछले कुछ महीनों से भुगतान न होने के कारण हलवाई ने भोग तैयार करने से मना कर दिया, जिसके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई।

गोस्वामियों में आक्रोश

मंदिर के गोस्वामियों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि ठाकुर जी की सेवा में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। गोस्वामियों का आरोप है कि प्रशासनिक अव्यवस्था और भुगतान में देरी के कारण आस्था से जुड़ी परंपरा को ठेस पहुंची है।

हाई पावर कमेटी ने दिया आश्वासन

हाई पावर कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति से बात की गई है। हलवाई का भुगतान शीघ्र करने के निर्देश दे दिए गए हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए कड़े आदेश जारी किए जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मामला

बांके बिहारी मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में भोग जैसी महत्वपूर्ण परंपरा का टूटना भक्तों के लिए पीड़ादायक है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मंदिर प्रशासन और हाई पावर कमेटी इस तरह की चूक दोबारा न होने देने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

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