नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। परिसीमन का विवाद गहराता जा रहा है। चेन्नई में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के नेतृत्व में 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और डिप्टी CM की बैठक हुए है। इस बैठक में सीएम एमके स्टालिन ने कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर हमें एकजुट रहना होगा। वर्ना हमारी पहचान का खतरा होगा। संसद में हमारा प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। परिसीमन विवा के बीच RSS का भी बयान सामने आया है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में RSS की तीन दिवसीय बैठक हो रही है। मंथन का आज दूसरा दिन है। इस दौरान RSS के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार समाज में सबको लेकर चलने की बात होनी चाहिए। अविश्वास खड़ा करने से बचना चाहिए।
‘अभी कोई नया एक्ट आया क्या?’
शनिवार को RSS के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने बेंगलुरु में एक प्रेसवार्ता की और बांग्लादेश, परिसीमन जैसे मुद्दों पर बात कहीं। उन्होंने परिसीमन विवाद पर कहा कि, परिसीमन लेकर अनावश्यक आशंका जाहिर की जा रही है। समाज में सबको साथ लेकर चलने की बात करनी चाहिए। भ्रमित करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिलिमिटेशन के लिए एक्ट आता है। पहले परिसीमन एक्ट 1979 बना। उसके बाद परिसीमन एक्ट 2002 आया। उसके बाद परिसीमन को फ्रीज कर दिया गया। तो सवाल ये कि अभी कोई नया एक्ट आया क्या?
‘परिसीमन से पहले जनसंख्या गणना की जाती है’
उन्होने आगे कहा कि, परिसीमन पर जो लोग मुद्दे को उठा रहे हैं, उनसे पूछिए कि परिसीमन से पहले जनसंख्या की गणना की जाती है। उसके बाद परिसीमन एक्ट आता है। ऐसा कुछ हुआ भी नहीं है फिर भी वो परिसीमन को विरोध कर रहे है। जो लोग परिसीमन को मुद्दा बना रहे हैं, उनको इंट्रोइंस्पेक्शन करना चाहिए कि क्या जो वो कर रहे हैं वो सही है?
हम परिसीमन के खिलाफ नहीं- स्टालिन
परिसीमन पर संघ का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब चेन्नई में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के नेतृत्व में पांच राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच बैठक हुई। इस बैठक में परिसीमन को लेकर सीएम स्टालिन ने कहा कि, वर्तमान जनसंख्या के हिसाब से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं होना चाहिए। हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, हम निष्पक्ष परिसीमन के पक्ष में हैं। अधिकार बने रहें, इसके लिए निरंतर कार्रवाई बहुत जरूरी है।





