नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की परेशानियां बढ़ सकती हैं। उन पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगा है, जिसे लेकर एक नई याचिका दाखिल की गई है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पुनरीक्षण याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ कर दिया है और मामले की दोबारा सुनवाई की राह खोल दी है। अदालत ने महानिबंधक कार्यालय को निर्देश दिया है कि वह याचिका को नियमित नंबर देकर उसे पेश करे। इससे पहले देरी के कारण यह याचिका खारिज कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिर से सुनवाई का आदेश दिया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह निर्णय लिया है।
इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी की ओर से पुनः निरीक्षण याचिका दाखिल की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 6 मई तय की है। यह सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकल पीठ में हुई थी।
मौर्य पर लगे ये गंभीर आरोप, FIR दर्ज करने की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा दाखिल याचिका में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने हिंदी साहित्य सम्मेलन से प्राप्त की गई एक कथित फर्जी डिग्री के आधार पर चुनाव लड़ा और पेट्रोल पंप का आवंटन भी प्राप्त किया। उनका कहना है कि इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
इसी मांग को लेकर याची ने पहले जिला न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत आवेदन दिया था, जिसे अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया। इसके बाद याची ने 318 दिन की देरी से हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे समय पर दाखिल न करने के कारण खारिज कर दिया गया था। हालांकि, याची ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामले को गुण-दोष के आधार पर पुनः विचार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया। अब हाईकोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और अगली सुनवाई की तारीख 6 मई तय की गई है।





