नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। शंभू बॉर्डर पर किसान पिछले कई दिनो से आंदोलित है। अपनी मांगों को लेकर देश के कई राज्यों के किसान शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे है। इसी बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है कि, आज एक किसान ने आत्महत्या कर लिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, किसान ने आज सुबह सल्फास की गोलियां खा ली। जिससे उसकी हालत गंभीर होने पर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुसाइड करने वाले किसान का नाम रेशम सिंह बताया जा रहा है। वो पिछले 11 महीने से आंदोलन में शामिल थे। वह तरनतारन जिले के पहुविंड गांव के रहने वाले थे। वहीं किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि रेशम सिंह किसान की आज सल्फास खाने से मौत हो गई है। रेशम सिंह की मौत की जिम्मेदार सरकार है। रेशम सिंह केंद्र सरकार से कापी नाराज थे। सरकार किसानों की समस्या का हल नहीं निकलने से खफा रेशम सिंह ने सल्फास खाकर अपनी जान दे दी। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पिछले 11 महीनों से किसानों की मांगों को आंदोलन किया जा रहा है लेकिन बावजूद समस्या का सरकार द्वारा कोई समाधान नहीं किया जा रहा है।
इस बीच, आंदोलन में शामिल किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने किसान रेशम सिंह की मौत पर दुख जताया। और कहा कि, रेशम सिंह किसान ने आज जहर खाकर अपनी जान दे दी है। इस मौत की जिम्मेदार केंद्र सरकार है। मरने से पहले उन्होंने कहा है क्योंकि सरकार किसानों की मांगों को वाजिब नही मान रही। वहीं किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल पिछले 45 दिनों से आमरण अनशन पर है लेकिन फिर भी सरकार किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है। इससे किसान कापी नाराज है और इसलिए जिन लोगों ने किसान रेशम सिंह को आत्महत्या करने के लिए उकसाया या मजबूर किया उनके खिलाफ केस कर उनके पर मुकदमा चलाएंगे।
फरवरी से शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे हैं किसान
सुरक्षाकमियों के द्वारा दिल्ली कूच करने के लिए निकले किसानों को रोके जाने के पिछले एक साल से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर अपना डेरा जमाए हुए है। वहीं किसानों की इससे पहले 13 फरवरी और 21 फरवरी को दिल्ली कूच की योजना थी, लेकिन दिल्ली में घूसने से पहले ही सीमा पर भारी संख्या में सुरक्षा बलो को तैनात कर उन्हें रोक दिया।
इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले 101 किसानों के जत्थे ने 6 और 8 दिसंबर को दिल्ली के लिए पैदल मार्च करने का प्रयास किया गया था। लेकिन हरियाणा पुलिस ने वहां से आगे नहीं बढ़ने दिया। इस दौरान किसानों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प भी हुए और टकराव की स्थिति बन गई। जिसके बाद किसानों पर लिए आंसू गैस के गोलों दोगे गए और उन्हें पीछे धकेलने में पुलिस कामयाब रहे।
किसान नेता डल्लेवाल की भी हालत नाजुक
वहीं किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की भी हालत नाजुक बताई जा रही है, किसानों के मांगों को लेकर पिछले करीब 45 दिनों से आमरण अनशन पर कर रहे है। मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि, डल्लेवाल की हालात गंभीर बनी हुई है, वे सही से बोल भी नहीं पा रहे है। बुधवार को जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अपने किसानों से कहा कि हमारे मरने के बाद भी अनशन जारी रखें। अपने करीबी साथी और नेताा काका सिंह कोटड़ा को उन्होने एक मार्मिक संदेश में भेजकर डल्लेवाल ने कहा कि, मेरे पार्थिव शरीर को धरना स्थल पर रखा जाए और किसी अन्य नेता द्वारा अनशन जारी रखा जाए।
क्या हैं किसानों की मांगें?
किसानों पिछले कई दिनों से आंदोलित है वह फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे है, उसके अलावा, किसान कर्ज हाफ हो, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, सस्ती बिजली दर, पुलिस मामलों को वापस लेने और 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए “न्याय” की मांग कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को लागू किया जाए और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देना भी उनकी मांगों का हिस्सा है।





