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Monday, March 2, 2026
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‘सांस लेना भी मुश्किल’ प्रदूषण पर BJD सांसद की मांग, कहा- किसी दूसरे शहर में आयोजित हो बजट सत्र

दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण संसद सत्र और सांसदों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है। अब सवाल यह है कि सरकार बदलती परिस्थितियों में संसदीय कार्यवाही को सुरक्षित बनाने के लिए कब तक कदम उठाएगी।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण हर साल भयावह स्तर तक पहुंचता है। हवा में घुलता धुआं न सिर्फ आम लोगों की सेहत पर असर डालता है, बल्कि संसद में कार्यवाही करने आने वाले सांसदों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए भी खतरा बन चुका है। इसी को लेकर बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सदस्य मानस रंजन मंगराज ने संसद और केंद्र सरकार को कड़े शब्दों में चेताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की हवा अब ‘मानव निर्मित आपदा’ में बदल चुकी है और ऐसे में संसद के शीतकालीन और बजट सत्र को किसी साफ-सुथरे शहर में आयोजित करना देशहित में होगा।

”आपदा से निपटना ओडिशा से सीखें”

मंगराज ने कहा कि उनका राज्य हर साल चक्रवात और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सक्षम है और समय रहते लाखों लोगों की जान बचा सकता है। लेकिन दिल्ली के प्रदूषण ने उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया है। उन्होंने कहा-ओडिशा जानता है संकट क्या होता है, पर मुझे सबसे ज्यादा परेशान करता है राजधानी दिल्ली की हवा। सांसद ने तर्क दिया कि अगर ओडिशा संकट में लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा सकता है, तो केंद्र सरकार भी सांसदों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए संसद के दो प्रमुख सत्रों को कहीं और शिफ्ट कर सकती है।

हवा में जहरीले तत्व-सांसदों और कर्मचारियों के लिए खतरा

मंगराज ने कहा कि सांसदों, संसदीय कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों, ड्राइवरों और सफाई कर्मचारियों को हर रोज़ जहरीली हवा में सांस लेना पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अक्टूबर से जनवरी के बीच हवा की गुणवत्ता और खराब हो जाती है, जबकि इसी दौरान शीतकालीन और बजट सत्र आयोजित होते हैं। ऐसे में जीवन को अनावश्यक खतरे में डालना पड़ता है।

वैकल्पिक शहरों का सुझाव

बीजद सांसद ने संसद सत्र के आयोजन के लिए कुछ वैकल्पिक शहरों के नाम सुझाए, जहां हवा साफ और बुनियादी ढांचा बेहतर है। ये शहर हैं- भुवनेश्वर, हैदराबाद, बेंगलुरु, गांधीनगर, गोवा और देहरादून। मंगराज ने कहा कि इन शहरों में संसदीय सत्र सुरक्षित और प्रभावी तरीके से आयोजित किए जा सकते हैं।

”राजनीति नहीं, जीवन और स्वास्थ्य की बात”

सांसद ने स्पष्ट किया कि उनका यह प्रस्ताव किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि सांसदों, कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने कहा-संसद को उदाहरण पेश करना चाहिए। जीने का अधिकार राजनीति और निंदा से पहले आता है। साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की कि सर्दियों के महीनों में बेहतर वायु गुणवत्ता वाले शहरों में संसद सत्र आयोजित करने की व्यवहार्यता तुरंत जाँची जाए, ताकि सभी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

दिल्ली प्रदूषण के मुख्य कारण

दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं- वाहनों का भारी उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और मौसम के कारण हवा का ठहराव। अक्टूबर से जनवरी के बीच ये सभी कारक मिलकर राजधानी की हवा को सबसे जहरीली बना देते हैं, जिससे संसद सत्र में शामिल सांसद और कर्मचारी लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य का गंभीर संकट बन चुका है। बीजद सांसद की यह मांग संसद और सरकार दोनों के लिए चेतावनी है कि बदलते मौसम में संसदीय कार्यवाही की रणनीति बदलनी होगी ताकि सभी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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