नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 14 फरवरी को असम के डिब्रूगढ़ में हाईवे पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया। ELF यानी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी एक खास हाईवे स्ट्रिप होती है। आम दिनों में यहां गाड़ियां चलती हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे रनवे में बदला जा सकता है, जहां लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उतर और उड़ान भर सकते हैं।
PM मोदी ने C-130J से की लैंडिंग
प्रधानमंत्री मोदी खुद Indian Air Force के C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे। यह भारत की सैन्य तैयारी और आत्मविश्वास का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। इससे पहले 2021 में उत्तर प्रदेश में बनी इसी तरह की स्ट्रिप पर भी उन्होंने लैंडिंग की थी।
डिब्रूगढ़ ELF क्यों है खास?
डिब्रूगढ़, Dibrugarh ऊपरी असम में स्थित है और भारत-चीन सीमा के काफी करीब है। ऐसे में यह सुविधा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। अगर किसी युद्ध या आपात स्थिति में मुख्य एयरबेस क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो यह ELF वैकल्पिक रनवे का काम करेगी। विमानों को अलग-अलग जगह तैनात करने की सुविधा मिलेगी दुश्मन के लिए निशाना बनाना मुश्किल होगा पूर्वी सेक्टर में हवाई ताकत और मजबूत होगी राफेल से लेकर हेलीकॉप्टर तक की सफल रिहर्सल इस ELF पर पहले ही फुल-स्केल रिहर्सल हो चुकी है। राफेल और सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमान C-130J सुपर हरक्यूलिस, डोर्नियर सर्विलांस विमान, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) सभी ने सफलतापूर्वक ‘टच एंड गो’ और कॉम्बैट फॉर्मेशन लैंडिंग की। हेलीकॉप्टर से कैजुअल्टी इवैक्यूएशन का अभ्यास भी किया गया। यह सुविधा युद्ध के साथ-साथ आपदा राहत और मानवीय मिशनों में भी काम आएगी।
देशभर में 28 ELF बनाने की योजना
सड़क परिवहन मंत्रालय और वायुसेना मिलकर देशभर में 28 जगहों की पहचान कर चुके हैं, जहां ELF बनाई जा रही है। असम में ही 5 ELF बनने की योजना है। इससे पहले से मौजूद एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स को भी आधुनिक बनाया गया है। पूर्वोत्तर भारत में रक्षा और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे प्रस्तावित अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग ऑल-वेदर रोड और स्ट्रैटेजिक टनल सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर निर्भरता कम करने की योजना पूर्वोत्तर भारत चीन, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पास स्थित है। यहां पहाड़, नदियां और बाढ़ जैसी भौगोलिक चुनौतियां हैं।





