नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने पंचकूला में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) अदालत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय को गैर कानूनी तरीके से राजोकरी स्थित ग्रीन्स फार्म नंबर 22, दक्षिणी दिल्ली से चलाने को लेकर याचिका डाली हुई है। दरअसल, यह संपति यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पास बंधक रखी हुई थी। जिसकी किस्त का भुगतान न करने पर बैंक ऑफ इंडिया ने 2017 में इस संपति पर कब्जा कर लिया था। यह संपति विजडम रियलटर्स की थी, जो अपनी गिरवी रखी गई संपति को बैंक से छुटा नहीं पाया था।
बैंक को वर्ष 2019 में पता चली ये बात
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार पंचकूला में यूनियन बैंक की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा है कि बैंक को वर्ष 2019 में पता चला कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले उनकी संपत्ति को कुर्क किया था और बाद में उसको जब्त कर लिया था। जबकि यह संपति हमारे ( यूनियन बैंक) पास गिरवी थी।
इस फार्म हाउस की कीमत 120 करोड़ रुपये के करीब है
जानकारी के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ED) राजोकरी स्थित ग्रीन्स फार्म नंबर 22 को अपना गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय के रूप में चला रहा है, जो कि दक्षिणी दिल्ली में स्थित है। इस कार्यलय में ED के 100 के करीब कर्मचारी काम कर रहे हैं। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस फार्म हाउस की कीमत 120 करोड़ रुपये के करीब है। नई दिल्ली में स्थित ईडी मुख्यालय में जब्त की गई महंगी कारों को रखने की जगह कम होने के कारण ED का गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय कुछ कारों को इस फार्म हाउस में रख रहा है। 3 अक्टूबर को यहां 1 करोड़ से अधिक रुपये की 40 कारें मौजूद थी।
यह PMLA कानून के खिलाफ है: Union Bank
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का कहना है कि कुर्की या जब्ती का उद्देश्य सरकारी खजाने के लिए बकाया राशि वसूलना है। न कि अपना निजी कार्यालय बनाकर उसका इस्तेमाल करना। ED ने कुर्की और जब्ती के बावजूद यह संपत्ति न तो बैंक को सौंपी है और न ही सार्वजनिक धन वसूलने के लिए इसकी नीलाम की है। जो कि पीएमएलए कानून के खिलाफ है। यह मामला पीएमएलए कोर्ट में विचाराधीन है।





