नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। यूपीएससी की तैयारी कराने वाले मशहूर कोचिंग संस्थान दृष्टि IAS पर एक बार फिर भ्रामक विज्ञापन चलाने का मामला सामने आया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण CCPA ने UPSC CSE 2022 के रिजल्ट को लेकर गलत दावे करने पर संस्थान पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
क्या था मामला?
Drishti IAS ने अपने विज्ञापन में दावा किया था कि 216+ छात्रों का चयन उनकी कोचिंग से हुआ है। जांच में पाया गया कि इन 216 में से 162 छात्रों ने केवल इंटरव्यू प्रैक्टिस प्रोग्राम निःशुल्क में भाग लिया था। सिर्फ 54 छात्र ही कोचिंग के असली पाठ्यक्रमों IGP और अन्य से जुड़े थे। यानी संस्थान ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया और छात्रों-अभिभावकों को गुमराह किया।
पहले भी लग चुका है जुर्माना
यह पहला मौका नहीं है जब Drishti IAS पर कार्रवाई हुई हो। सितंबर 2024 में UPSC CSE 2021 के रिजल्ट को लेकर गलत दावे पर संस्थान पर 3 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया था। तब भी दावा किया गया था कि 150+ छात्र चयनित हुए, जबकि असल में अधिकतर उम्मीदवारों ने केवल सीमित कार्यक्रमों में भाग लिया था। चेतावनी के बावजूद संस्थान ने फिर से झूठा दावा किया, जिसके बाद अब दूसरी बार कड़ी कार्रवाई की गई है। छात्रों और अभिभावकों को कैसे गुमराह किया जाता है? PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान ने विज्ञापनों में यह तथ्य छिपा लिया कि छात्र किन पाठ्यक्रमों से जुड़े थे और कितने समय तक उन्होंने तैयारी की। इस वजह से ऐसा भ्रम पैदा हुआ कि सफलता का पूरा श्रेय संस्थान को जाता है। वास्तव में कई उम्मीदवार केवल इंटरव्यू गाइडेंस या शॉर्ट-टर्म कोर्स से जुड़े थे। अब तक 54 संस्थानों पर नोटिस CCPA के मुताबिक,अब तक 54 कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापन के लिए नोटिस दिया जा चुका है। 26 संस्थानों पर 90.6 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। इन सभी से कहा गया है कि छात्रों और अभिभावकों के भरोसे से खिलवाड़ बंद करें और पारदर्शी जानकारी दें। यह मामला छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है कि सिर्फ विज्ञापनों के दावों पर भरोसा न करें। कोचिंग संस्थानों को अब साफ संदेश दिया गया है कि झूठे प्रचार और “गारंटीड सफलता” जैसे वादों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।





