नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । उत्तरप्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने ओबीसी आरक्षण में लागू क्रीमी लेयर व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि संविधान ने पिछड़े वर्गों को सामाजिक न्याय की भावना से आरक्षण का अधिकार दिया है, लेकिन मौजूदा क्रीमी लेयर प्रावधान उन्हें हक से वंचित कर रहा है।
नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने मांग की है कि ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर व्यवस्था खत्म की जाए और आय सीमा बढ़ाई जाए। चंद्रशेखर आज़ाद का कहना है कि यह प्रावधान सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ है और लाखों पिछड़े वर्गों को उनके हक से वंचित कर रहा है।
क्रीमी लेयर व्यवस्था खत्म करने के मांग
आसपा सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा कि, संविधान की भावना के अनुरूप ओबीसी को आरक्षण दिया गया है, लेकिन मौजूदा क्रीमी लेयर व्यवस्था समाज के पिछड़े वर्ग को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रही है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए व्यवस्था समाप्त करने की मांग की।
यह प्रावधान असंवैधानिक लगता है- नगीना सांसद
पीएम मोदी को लिखे पत्र में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि क्रीमी लेयर का प्रावधान सामाजिक न्याय की मूल आत्मा के विपरीत और असंवैधानिक प्रतीत होता है। उन्होंने आग्रह किया कि सरकार संसद में बिल लाकर ओबीसी आरक्षण से इस व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त करे, ताकि पिछड़े वर्गों को उनका वास्तविक हक मिल सके।
नगीना सांसद ने वर्तमान में आय सीमा को तुरंत प्रभाव से बढ़ाकर 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष करने की मांग की है, ताकि अधिक से अधिक जरुरतमंद परिवार इसका लाभ प्राप्त कर सके।’
केंद्र सरकार क्रीमी लेयर पर कर रही विचार
बता दें कि, केंद्र सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर अहम कदम पर विचार कर रही है। खबर है कि सरकार क्रीमी लेयर की इनकम सीमा में एकरूपता लाने की तैयारी में है। यानी सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, विश्वविद्यालय या फिर निजी संस्थान- सभी के लिए ओबीसी क्रीमी लेयर की आय सीमा एक समान तय करने का प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।
अनुप्रिया पटेल ने उठाई थी मांग
ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर की आय सीमा को लेकर सरकार की कवायद का मकसद यही है कि तय मानकों में निष्पक्षता बनी रहे। कौन इसके दायरे में आए और किसे बाहर रखा जाए, यह साफ हो सके। इससे पहले अपना दल (S) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल भी यही मांग उठा चुकी हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी और केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।





