नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव नरुला की बेंच ने खादी नाम से मिलते-जुलते दो संगठनों को खादी नाम से अपना व्यवसाय करने पर रोक लगा दी है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग की याचिका पर हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया। खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने नोएडा के खादी डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (केडीसीआई) और मिस इंडिया खादी फाउंडेशन (एमआईकेएफ) के खिलाफ याचिका दायर कर कहा था कि वे उसके ब्रांड का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। खादी और ग्रामोद्योग ने कहा कि दोनों संगठनों के नाम उसके नाम से मिलते-जुलते हैं जो ट्रेडमार्क का उल्लंघन है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने कहा कि दोनों संगठनों ने 19 से 22 दिसम्बर, 2020 को गोवा में नेशनल खादी डिजाइनर्स अवार्ड्स 2019 का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम का आयोजन कर दोनों संगठनों ने ये संदेश देने की कोशिश की कि ये खादी और ग्रामोद्योग आयोग का ही आयोजन है। हाईकोर्ट ने केडीसीआई और एमआईकेएफ के सीईओ अंकुश अनामी को निर्देश दिया कि वे अपने इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक अकाउंट पर डाले गए सभी वीडियो और मीडिया को हटाएं। हाईकोर्ट ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग की इस दलील को मंजूर कर लिया कि दोनों संगठनों के वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज इस तरह से डिजाइन किए गए हैं जैसे वे और खादी और ग्रामोद्योग आयोग एक हैं और वे सरकारी उपक्रम हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि दोनों संगठनों ने उपभोक्ताओं की भ्रामक सूचना देकर खादी और ग्रामोद्योग आयोग की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए खादी केडीसीआई और एमआईकेएफ को निर्देश दिया कि वे अगले आदेश तक अपने वेबसाइट www.paridhaanam.com, www.kdci.org और www.missindiakhadi.in पर अपलोड किए गए कंटेंट को हटाएं। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत




