नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजधानी दिल्ली में रह रहे कश्मीरी विस्थापितों के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। दशकों से अपने घरों से बेघर इन परिवारों को अब राहत राशि पाने के लिए किसी आय सीमा का बंधन नहीं झेलना होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने घोषणा की है कि अब सभी 1800 पंजीकृत कश्मीरी विस्थापित परिवारों को प्रति सदस्य 3250 रुपए की मासिक राहत दी जाएगी। यह राहत अधिकतम चार सदस्यों तक सीमित होगी, यानी एक परिवार को हर महीने 13,000 रुपए तक की आर्थिक सहायता सीधे सरकार की ओर से दी जाएगी।
अब तक क्यों थी राहत रुकी?
1990 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद की विभीषिका के चलते हजारों कश्मीरी हिंदू परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर दिल्ली और एनसीआर में शरण लेनी पड़ी थी। लंबे समय तक इन्हें ‘एड-हॉक मंथली रिलीफ’ दी जाती रही, लेकिन आय सीमा (26,800रुपए माह) और पुराने रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण बीते डेढ़ साल से राहत राशि वितरण बंद पड़ा था। मुख्यमंत्री गुप्ता ने बताया कि नीतिगत जटिलताओं और रिकॉर्ड से जुड़ी खामियों ने इन परिवारों को बहुत परेशान किया। अब सरकार ने इस बाधा को दूर करते हुए आय सीमा की शर्त को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
”विशेष अवसर योजना” के तहत होगी पारदर्शिता
दिल्ली सरकार ने इस फैसले को विशेष अवसर योजना के रूप में लागू करने की घोषणा की है। इसके अंतर्गत सभी विस्थापित परिवारों को परिवार के अद्यतन विवरण दर्ज करने का एकमात्र अवसर मिलेगा। इस प्रक्रिया में न कोई पूर्व वसूली होगी, न कोई दंड। इससे पुराने रिकॉर्ड में पारदर्शिता और विश्वसनीयता लाई जाएगी।
यह दया नहीं, अधिकार है-रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया, यह सहायता कोई दया नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक अन्याय का मानवीय समाधान है। यह राहत उस पीड़ा को मान्यता देती है, जिसे विस्थापित समुदाय ने दशकों तक झेला है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सितंबर 2025 तक की समस्त बकाया राहत राशि भी जारी की जाएगी, जिससे लंबे समय से रुके पड़े हजारों परिवारों को तात्कालिक राहत मिल सके।




