नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोरक्को की राजधानी रबात में भारतीय समुदाय के साथ संवाद करते हुए पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि PoK के लोग अब खुद आवाज उठा रहे हैं कि ‘मैं भी भारत हूं’ और वह दिन दूर नहीं जब PoK स्वेच्छा से भारत का हिस्सा बनेगा।
राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना द्वारा हाल ही में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत की सैन्य क्षमता और संप्रभुता की रक्षा में दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत केवल सीमाओं की सुरक्षा में ही नहीं, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और वैश्विक स्तर पर भी तेजी से प्रगति कर रहा है। विदेश में बसे भारतीयों की मेहनत और योगदान को उन्होंने विशेष रूप से सराहा और कहा कि भारतीय प्रवासी देश की ताकत का विस्तार हैं।
“बिना हमला किए हमारा होगा PoK”- राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय समुदाय से संवाद के दौरान पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर एक दृढ़ और आत्मविश्वास से भरा बयान दिया। उन्होंने कहा कि PoK को भारत में शामिल करने के लिए किसी हमले की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब वहां के लोग खुद भारत से जुड़ने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि पांच साल पहले जब मैं कश्मीर घाटी में भारतीय सेना को संबोधित कर रहा था, तब मैंने कहा था कि PoK पर हमला करने की कोई जरूरत नहीं है। वो तो हमारा ही हिस्सा है। और अब PoK की धरती से आवाजें उठने लगी हैं – ‘मैं भी भारत हूं’। वह दिन जरूर आएगा जब PoK स्वयं भारत का हिस्सा बनने की बात करेगा। उन्होंने कहा कि PoK में हो रहे जनमानस के बदलाव भारत की स्पष्ट, मजबूत और दूरदर्शी नीति का परिणाम हैं। आज वहां के नागरिक खुलकर भारत के साथ जुड़ने की बात कर रहे हैं, जो इस दिशा में एक बड़ा संकेत है।
ऑपरेशन सिंदूर : निर्णायक प्रहार
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की त्वरित और सटीक कार्रवाई की विदेश में बसे भारतीय समुदाय ने जोरदार सराहना की। यह ऑपरेशन पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर हुए कायराना हमले के बाद अंजाम दिया गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना पूरी तरह तैयार थी, और सरकार ने उन्हें पूरी स्वतंत्रता दी थी। लेकिन भारत ने संयम दिखाया। हमारी कार्रवाई बदले की भावना से नहीं, बल्कि न्याय की भावना से प्रेरित थी।
उन्होंने रामचरितमानस से एक प्रेरणादायक उद्धरण साझा करते हुए कहा कि हमने धर्म देखकर नहीं, कर्म देखकर मारा है। इसका अर्थ यह था कि भारत ने सिर्फ उन पर प्रहार किया जो दोषी थे और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह भारत की मजबूत लेकिन शांति-प्रिय नीति का प्रतीक है। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद भारतीय समुदाय ने सेना की बहादुरी पर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपना सम्मान प्रकट किया।
राजनाथ सिंह ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां
राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में भारत द्वारा हासिल की गई बड़ी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक अस्थिरता और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने खुद को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि भारत ग्लोबल इकॉनमी रैंकिंग में 11वें स्थान से उठकर अब 4वें स्थान पर पहुंच चुका है, और जल्द ही टॉप 3 में शामिल होने की दिशा में अग्रसर है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आज डिजिटल बदलाव का नेतृत्व कर रहा है। देश की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व गति से बढ़ रही है, जिससे डिजिटल सेवाएं आम जनजीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जहां एक दशक पहले देश में सिर्फ 18 यूनिकॉर्न थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 118 हो चुकी है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। भारत आज 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिसकी कुल कीमत 23000 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, यह भारत की मेहनत, नीति और विजन का नतीजा है। भारत अब सिर्फ उभरती ताकत नहीं, बल्कि दुनिया की निर्णायक शक्ति बनता जा रहा है।
राजनाथ सिंह ने प्रवासी भारतीयों की प्रशंसा की
राजनाथ सिंह ने मोरक्को में बसे भारतीय समुदाय की मेहनत, ईमानदारी और समर्पण की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रवासी भारतीय न केवल आर्थिक योगदान दे रहे हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मूल्यों और चरित्र की असली पहचान भी दुनिया के सामने रख रहे हैं। राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि 1893 में शिकागो की विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारतीय संस्कृति में चरित्र ही व्यक्ति की पहचान बनाता है और आज आप सभी उसी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रवासी भारतीय दुनिया भर में भारत की सकारात्मक छवि और सम्मान को बढ़ा रहे हैं और यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति सीमाओं से परे एक वैश्विक ताकत बन चुकी है। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद भारतीय समुदाय ने भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में हो रहे तेज बदलाव और देश की बढ़ती वैश्विक स्थिति पर गर्व प्रकट किया।





