नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के बीच महायुति गठबंधन बीजेपी, शिवसेना और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी में तनाव बढ़ता दिख रहा है। तीनों दलों के नेता एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं और कुछ नेता अन्य पार्टियों में शामिल भी हो रहे हैं, जिससे गठबंधन में अस्थिरता नजर आ रही है।
हाल ही में राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गठबंधन के अन्य घटक दलों को चेतावनी दी थी कि वे अपनी पार्टी के नेताओं को महायुति के अन्य घटक दलों में शामिल न करें। इसके बावजूद बुधवार को बीजेपी ने डोंबीवली के विकास देसले और अभिजीत थरवाल को पार्टी में शामिल कर लिया, जिससे शिंदे की चेतावनी को नजरअंदाज करने का संदेश गया।
महाराष्ट्र में महायुति में तनाव बढ़ा
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन में खींचतान बढ़ती जा रही है। शिवसेना नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी के नेता और विधायक राजेश मोरे ने प्रेस वार्ता में बीजेपी महाराष्ट्र के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण पर तीखा हमला किया। मोरे ने आरोप लगाया कि चव्हाण ने महायुति के नियम और नीतियों का उल्लंघन किया है और बीजेपी द्वारा शिवसेना नेताओं को शामिल करने का निर्णय अस्वीकार्य है। इसी प्रेस वार्ता में शिवसेना के जिला उपाध्यक्ष राजेश कदम ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता शिवसेना नेताओं के घर जाकर उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं। यह घटनाक्रम महायुति गठबंधन में बढ़ते तनाव और असंतोष को दर्शाता है।
बीजेपी का शिवसेना पर आरोप
शिवसेना की प्रेस वार्ता के बाद बीजेपी की कल्याण इकाई के अध्यक्ष नंदू परब ने शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने कल्याण लोकसभा क्षेत्र में महायुति के नियम और नीतियों की अनदेखी की। नंदू परब ने कहा कि दोनों दलों के नेताओं के बीच नियमों और नीतियों पर सहमति होने के बावजूद शिवसेना ने अंबरनाथ में रॉसलिन फर्नांडिज को पार्टी में शामिल कर नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी अध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब किसी भी शिवसेना नेता को बीजेपी में शामिल न किया जाए। नंदू परब ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में शिवसेना ने ऐसा दोबारा किया तो बीजेपी भी पीछे नहीं हटेगी।




