नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मुंबई में एक फिर से हिन्दी बनाम मराठी भाषा को लेकर विवाद सामने आया है। भांडुप इलाके में सोमवार रात साईं राधे नाम की एक बिल्डिंग में पिज्जा डिलीवरी के लिए पहुंचे डोमिनोज के एक कर्मचारी रोहित के साथ एक दंपत्ति ने कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि दंपत्ति ने उससे मराठी भाषा में बात करने की मांग की और जब उसने हिंदी में जवाब दिया, तो उन्होंने भुगतान करने से इनकार कर दिया। आरोपी दंपत्ति ने डिलीवरी ब्वॉय से कहा कि वह जब तक वह मराठी नहीं बोलेगा, उसे पैसे नहीं मिलेंगे।
इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक डिलीवरी ब्वॉय फ्लैट के दरवाजे के बाहर खड़ा है, जबकि अंदर से एक दंपत्ति उससे मराठी में बात करने की मांग कर रही है। महिला की आवाज स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है, जिसमें वह कहती है, “मराठी बोलोगे तभी पैसे मिलेंगे।” डिलीवरी ब्वॉय, जो इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर रहा था, बार-बार यह पूछते सुना गया कि क्या मराठी बोलना अनिवार्य है? उसने यह भी कहा कि इस तरह भाषा थोपना जबरदस्ती है। वीडियो में महिला कई बार दोहराती है कि मराठी बोलना जरूरी है, तभी भुगतान किया जाएगा।
मुंबई के भांडुप इलाके में एक डिलीवरी ब्वॉय के साथ भाषा को लेकर हुई बहस अब चर्चा का विषय बन गई है। घटना के दौरान, जब रोहित नामक डोमिनोज कर्मचारी एक ऑर्डर पहुंचाने पहुंचा, तो ग्राहक दंपत्ति ने दरवाज़े पर उसे रोककर मराठी में बात करने की शर्त रख दी। वीडियो में यह पूछते सुना जा सकता है कि, “क्या मराठी बोलना जबरदस्ती है? लेकिन क्यों?” इसके जवाब में महिला कहती है, “हां, यहां ऐसा ही चलता है।” थोड़ी देर तक बहस चलती रही, जिसमें दंपत्ति कभी भाषा को लेकर, तो कभी पिज्जा को खराब बताकर आपत्ति जताते रहे, लेकिन न तो भुगतान किया और न ही पिज्जा वापस लौटाया। अंत में रोहित को बिना पैसे लिए लौटना पड़ा।
Domino’s की ओर से कोई बयान नहीं आया
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर डोमिनोज की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, यह विवाद अब केवल एक पिज्जा डिलीवरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मुंबई में चल रहे हिंदी बनाम मराठी भाषा विवाद की एक नई कड़ी बनता जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न बैंकों में जाकर कर्मचारियों को मराठी में संवाद न करने पर चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि महाराष्ट्र में काम करना है तो मराठी बोलनी ही पड़ेगी। अब भांडुप की यह घटना उसी बहस को और हवा देती प्रतीत हो रही है।





