नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में अब पर्यटक जंगल सफारी के दौरान मोबाइल फोन अपने साथ नहीं ले जा पाएंगे। वन्यजीवों की सुरक्षा और मानवीय हस्तक्षेप कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। पर्यटक, गाइड और रिजर्व के सभी कर्मचारियों को जंगल में प्रवेश से पहले अपने फोन गेट पर जमा करने होंगे। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन जंगल में कई तरह की परेशानियां पैदा कर रहे थे। फोटो और वीडियो लेने की होड़ में लोग जानवरों के बहुत करीब चले जाते थे, जिससे जानवर घबरा जाते थे और कभी-कभी आक्रामक हो जाते थे। इसके अलावा मोबाइल नेटवर्क के जरिए जानवरों की लोकेशन साझा होने से जिप्सियों का जमावड़ा भी बन जाता था। वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन
वन्यजीव संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर प्रशासन ने नई गाइडलाइन तैयार की है। पार्क के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि सभी नियमों को प्रभावी बनाने के लिए पर्यटकों को जंगल में प्रवेश से पहले अपने मोबाइल जमा करने होंगे। यह नियम सैलानियों के साथ-साथ रजिस्टर्ड टूर गाइड, जिप्सी ड्राइवर, नेचुरलिस्ट और कोर जोन के होटल व लॉज कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
फोटोग्राफी के लिए DSLR की अनुमति
प्रकृति और वन्यजीव फोटोग्राफी करने वाले पर्यटकों को DSLR या प्रोफेशनल कैमरे ले जाने की अनुमति दी जाएगी। इससे पर्यटक शोर-शराबे के बिना अपने अनुभव को कैद कर सकेंगे और वन्यजीवों को परेशान नहीं करेंगे।
प्रमुख सफारी क्षेत्र शामिल
यह नया आदेश कॉर्बेट रिजर्व के सभी प्रमुख क्षेत्रों में लागू होगा। इनमें ढिकाला, बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सर्पदुली, गैरल, सुल्तान, सोनानदी, पाखरो और सितावनी जैसे डे-सफारी और नाइट-स्टे वाले इलाके शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इससे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और पर्यटकों के अनुभव को भी सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
जंगल सफारी का सुरक्षित अनुभव
इस नए नियम से न केवल जानवरों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पर्यटक भी सुरक्षित तरीके से जंगल का आनंद ले पाएंगे। वन्यजीव विशेषज्ञ और एक्सपीरियंस नेचर राइड्स का कहना है कि मोबाइल फोन के बैन से वन्यजीवों पर दखल कम होगा और उनका प्राकृतिक व्यवहार बनाए रखा जा सकेगा। यह कदम पर्यटक सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।





