नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने अपने दूसरे साल के मौके पर बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मंत्रिमंडल से विभागवार रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह देखा जा सके कि कौन काम कर रहा है और कौन पीछे रह गया है। इस समीक्षा के बाद कुछ मंत्रियों को हटाया जा सकता है और कुछ वरिष्ठ विधायकों को मौका मिल सकता है। ऐसे संकेत हैं कि मंत्रिमंडल में नए चेहरे पुराने अनुभव का मिश्रण देखने को मिलेगा।
क्या कहा गया है रिपोर्ट में?
मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों से यह रिपोर्ट मांगी है कि उनकी जो जिम्मेदारियाँ थीं विभाग, योजनाएँ, बजट उपयोग आदि वह कितनी पूरी हुईं। सूत्रों के मुताबिक जिन मंत्रियों का कामकाज कमजोर माना जाएगा, उन्हें पद-चुनाव या बाहर किए जाने की संभावना है। वहीं, वरिष्ठ नेताओं और भरोसेमंद विधायकों को पुनः शामिल करने की तैयारी है इनमें गोपाल भार्गव, मालिनी गौड़, अर्चना चिटनिस, अजय विष्णोई, हरिशंकर खटीक और ललिता यादव जैसे नाम चर्चा में हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और क्यों है विस्तार जरूरी?
भाजपा ने इस साल विभिन्न राज्यों में सफल प्रदर्शन किया है, जिससे मध्य प्रदेश में भी राजनीतिक गति बनी हुई है। ऐसे समय में जब विपक्ष दबाव में है, सरकार को यह संदेश देने की भी जरूरत है कि परफॉरमेंस को महत्व दिया जाएगा, सिर्फ पद नहीं। मंत्रिमंडल विस्तार एक संकेत है कि मुख्यमंत्री अपनी टीम को सक्रिय, जवाबदेह और जिम्मेदार रखना चाहते हैं न कि प्रतीकात्मक ही।
और क्या-क्या होगा?
समय-सीमा की स्पष्ट जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में विस्तार हो सकता है। नए चेहरे आएंगे, कुछ को विभाग बदले जा सकते हैं, कुछ वरिष्ठों को छोड़कर संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ दी जा सकती हैं। यह भी संभव है कि सांसद या अनुभवी विधायक मंत्रिपरिषद का हिस्सा न बनें बल्कि संगठन या पार्टी-कार्य में अग्रसर हों। यह विस्तार संदेश है कि निर्वाचित मंत्रियों को सिर्फ पद नहीं बल्कि परिणाम देना होगा। यह संभावना भी है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद अपनी टीम में बदलाव के माध्यम से अपना प्रभाव और शक्ति बढ़ाना चाहते हैं। विपक्ष के लिए भी यह मौका है बदलाव को लेकर अगर असंतोष दिखा तो उसे राजनीतिक लाभ हो सकता है।





