नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी की एक रैली के दौरान हुई एक दुखद घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। 18 जून को जगन रेड्डी के काफिले की एक गाड़ी ने सी. सिंगय्या (53) नाम के एक कार्यकर्ता को कुचल दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
FIR दर्ज, गाड़ी जब्त
घटना के बाद पुलिस ने जांच करते हुए जिस गाड़ी से हादसा हुआ, उसे जगन रेड्डी की बताकर जब्त कर लिया। इसके साथ ही गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में रेड्डी और उनकी पार्टी के अन्य सदस्यों के नाम शामिल किए गए थे। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद रेड्डी को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
जगन रेड्डी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
जगन रेड्डी ने इस एफआईआर को राजनीतिक साजिश बताया और हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि उनका नाम जानबूझकर आरोपी के तौर पर जोड़ा गया है और यह सब उन्हें राजनीतिक रूप से फंसाने के लिए किया गया। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान जगन रेड्डी को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने सुनवाई में यह भी कहा कि, “कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में भी तमाम सुरक्षा के बावजूद हादसे हो जाते हैं।” इससे साफ संकेत मिला कि अदालत ने रेड्डी की मंशा पर सवाल नहीं उठाया और उन्हें कुछ हद तक राहत दी।
रेड्डी ने सत्तारूढ़ सरकार पर लगाए आरोप
जगन रेड्डी और उनकी पार्टी ने इस मामले को लेकर आंध्र प्रदेश की मौजूदा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ये सब ध्यान भटकाने की रणनीति है और जेड प्लस सुरक्षा में चूक के बावजूद उनके काफिले को दोषी ठहराया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जगन रेड्डी की ओर से अदालत को बताया गया कि सिंगय्या के परिवार को मुआवजा दिया गया है और पीड़ित परिवार ने रेड्डी के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने परिवार का बयान भी याचिका के साथ कोर्ट में पेश किया। इस पूरे मामले में वाईएसआरसीपी और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) आमने-सामने हैं। जहां TDP का कहना है कि कार्यकर्ता की मौत सीधे रेड्डी के काफिले की वजह से हुई, वहीं YSRCP इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बता रही है। जगन मोहन रेड्डी को इस हाई-प्रोफाइल मामले में फिलहाल राहत मिल गई है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर अभी थमा नहीं है।





