नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आठवीं कक्षा की नई सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का जिक्र होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। नई किताब National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने जारी की है, जिसमें न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों जैसे भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और जजों की कमी का उल्लेख किया गया है।
CJI ने लिया संज्ञान, जल्द सुनवाई का आश्वासन
भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की बात कही है। उन्होंने कहा, “किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस मामले की जल्द सुनवाई होगी। सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने यह मुद्दा उनके सामने उठाया था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस अध्याय को संविधान की मूल संरचना पर हमला बताया है। अदालत ने किताब के कंटेंट पर कड़ा विरोध दर्ज किया है।
किताब में क्या लिखा है?
नई किताब में कहा गया है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक चुनौती है। लंबित मामलों की संख्या बहुत अधिक है। जजों की कमी से न्याय में देरी होती है। किताब के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में करीब 81,000 मामले लंबित हैं। हाई कोर्ट में 62.40 लाख केस लंबित हैं। जिला और अधीनस्थ अदालतों में लगभग 4.70 करोड़ मामले पेंडिंग हैं। कुल मिलाकर देश में 5 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित बताए गए हैं। किताब में यह भी बताया गया है कि न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ शिकायतें केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) के जरिए दर्ज की जा सकती हैं। 2017 से 2021 के बीच इस तंत्र के जरिए 1,600 से अधिक शिकायतें मिलने का उल्लेख किया गया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश Bhushan Ramkrishna Gavai का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार की घटनाएं जनता के विश्वास को प्रभावित करती हैं, लेकिन पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई से भरोसा बहाल किया जा सकता है।
संसद में क्या कहा गया?
कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने लोकसभा में बताया था कि पिछले दस वर्षों में जजों के खिलाफ 8,630 शिकायतें CJI कार्यालय को मिलीं। साल 2016 से 2025 के बीच हर साल सैकड़ों शिकायतें दर्ज की गईं।
क्या है पूरा विवाद?
पहले की किताबों में न्यायालयों की संरचना और भूमिका पर फोकस था। नई किताब में पहली बार न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों की समस्या को विस्तार से शामिल किया गया है। इसी को लेकर न्यायपालिका के कुछ वर्गों ने आपत्ति जताई है, जबकि किताब में यह भी कहा गया है कि सरकार और अदालतें पारदर्शिता और टेक्नोलॉजी के जरिए सुधार की दिशा में काम कर रही हैं। NCERT की नई किताब में शामिल कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है।





