नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2027 में होने वाली जनगणना में जाति दर्ज करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। यह सुनवाई सोमवार, 2 फरवरी 2026 को हुई। मामले की सुनवाई भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। हालांकि कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार और भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त को एक अहम सुझाव जरूर दिया।
क्या थी याचिका और क्या मांग की गई थी?
यह जनहित याचिका शिक्षाविद आकाश गोयल ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि 2027 की जनगणना में जाति से जुड़े आंकड़े जुटाने, उनका वर्गीकरण करने और सत्यापन की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद हो। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सरकार ने यह तो साफ कर दिया है कि इस बार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा भी व्यापक जाति जनगणना होगी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जाति पहचान दर्ज करने का तरीका क्या होगा।
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई तयशुदा डेटा या पैमाना मौजूद नहीं है, जिसके आधार पर जाति की पहचान पहले से तय की जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम 1958 और उसके तहत बने 1990 के नियमों के अनुसार चलती है। कोर्ट ने कहा कि हमें इस बात पर शक करने की कोई वजह नहीं है कि संबंधित अधिकारी विशेषज्ञों की मदद से ऐसी व्यवस्था नहीं बनाएंगे, जिससे सभी आशंकाओं का समाधान हो सके।
याचिका क्यों खारिज की गई?
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जनगणना एक संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया है, जिसे चलाने की जिम्मेदारी कार्यपालिका और विशेषज्ञों की होती है। इस स्तर पर कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता पहले ही इस मुद्दे पर रजिस्ट्रार जनरल को अपनी बात रख चुके हैं, इसलिए इस पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन सरकार को क्या सुझाव दिया गया?
हालांकि याचिका खारिज कर दी गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और जनगणना से जुड़े अधिकारियों से कहा कि वे याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों और कानूनी नोटिस पर जरूर विचार करें। अगर जरूरी लगे, तो इन सुझावों को जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। साल 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार होगी, जिसमें बड़े स्तर पर जाति आधारित आंकड़े इकट्ठा किए जाएंगे। इसके साथ ही यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी। सरकार का कहना है कि डिजिटल सिस्टम से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और नतीजे जल्दी सामने आएंगे।





