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Wednesday, March 11, 2026
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बारिश पर बोले CJI गवई- 12 घंटे जाम में फंसे लोग क्यों दें टोल, जब दिल्ली 2 घंटे की बारिश में ही हो जाती है ठप

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टोल वसूली को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान दिल्ली की सड़क व्यवस्था और देशभर की हाईवे स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टोल वसूली को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान दिल्ली की सड़क व्यवस्था और देशभर की हाईवे स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने कहा कि दिल्ली की हालत ऐसी है कि अगर दो घंटे बारिश हो जाए तो पूरा शहर ठप हो जाता है।

मामला क्या है?

सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई राष्ट्रीय राजमार्ग-544 एडापल्ली से मन्नुथी खंड की खराब स्थिति को लेकर हो रही थी। केरल हाईकोर्ट ने त्रिशूर जिले के पेलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल वसूली रोक दी थी क्योंकि हाईवे की हालत बेहद खराब थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए NHAI और ठेकेदार कंपनी गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

सीजेआई गवई ने कहा कि अगर 65 किलोमीटर का सफर तय करने में लोगों को 12 घंटे लगते हैं, तो वे 150 रुपये टोल क्यों दें? जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने हल्के अंदाज में कहा कि “12 घंटे तक जाम में फंसे रहने पर तो हाईवे को यात्रियों को पैसा देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सर्विस रोड और वैकल्पिक मार्गों का भी रखरखाव नहीं होता, जिससे लोगों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ती है। जब NHAI की ओर से कहा गया कि ट्रैफिक इसलिए लगा क्योंकि एक लॉरी पलट गई थी, तो सीजेआई ने कहा कि “लॉरी अपने आप नहीं पलटी, गड्ढे की वजह से पलटी।

दिल्ली ट्रैफिक का भी जिक्र

सुनवाई के दौरान एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर हमेशा लगने वाले ट्रैफिक का जिक्र किया। इस पर सीजेआई गवई ने कहा:“दिल्ली की हालत तो जानते ही है, अगर यहां दो घंटे बारिश हो जाए तो पूरा शहर लकवाग्रस्त हो जाता है।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मानसून की वजह से अंडरपास और सड़क मरम्मत का काम प्रभावित हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले में कहा गया है कि टोल पूरी तरह बंद करने के बजाय उसमें आनुपातिक कमी की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया है, लेकिन साफ कहा कि खराब सड़कों पर टोल वसूली जायज नहीं है। अगर सड़कें ठीक नहीं होंगी तो जनता से पैसा नहीं लिया जा सकता। लोगों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केवल केरल के टोल विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने देशभर की सड़कों और दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था की हकीकत पर भी सीधा सवाल उठा दिया।

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